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रजस्वला स्त्री को कौन-कौन से कार्य नहीं करने चाहिए और क्यों ? कारण सहित स्पष्ट करें? - What are the tasks a woman should not do and why? Explain with reason?
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ब्राह्मण को देवता क्यो कहां गया है ? - Why has the Brahmin gone to the deity?
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ब्राह्मण को देवता वयों कहां गया है ? समूचा संसार देवताओं के अधीन माना गया है और देवता सदैव मंत्रों के अधीन रहते हैं। अर्थात् मंत्रों से उनकी पूजा, अराधना की जाती है तब वे प्रसन्न होते हैं और उन मंत्रों के ज्ञाता, मंत्रों का प्रयोग, रहस्य आदि को ब्राह्मण भली प्रकार जानते हैं। इस प्रकार ब्राह्मण देवताओं के समतुल्य हुए। इसीलिए ब्राह्मणों को देवता कहा जाता है।
नास्तिक का क्या अर्थ है. -What does atheist mean?
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SAMAYBUDDHA's Dhamm Deshna नास्तिक का क्या अर्थ है?…ओशो KSHMTABUDDHA 3 years ago Advertisements देवानंद, नास्तिक का अर्थ है—जो नहीं को जीवन का आधार बना ले, जो नकार को जीवन की शैली बना ले। नास्तिक का अर्थ वैसा नहीं है जैसा साधारणत: समझा जाता है। साधारणत: समझा जाता है जो ईश्वर को इनकार करे वह नास्तिक। वह परिभाषा मूलत: गलत है। क्योंकि बुद्ध ने ईश्वर को इनकार किया और बुद्ध से बड़ा आस्तिक पृथ्वी पर दूसरा नहीं हुआ। महावीर ने ईश्वर को इनकार किया, लेकिन क्या महावीर को नास्तिक कह सकोगे? और जो कह सके वह अंधा है। जो कह सके वह जड़ है। नास्तिक की पुरानी परिभाषा ओछी पड़ गई, छोटी पड़ गई। इसलिए मैं नहीं कहता कि नास्तिक वह है जो ईश्वर को अस्वीकार करता है। नास्तिक वह है जो अस्वीकार में जीता है। स्वभावत:, मेरे आस्तिक की परिभाषा भी भिन्न हो जाएगी। आस्तिक का अर्थ नहीं है कि जो ईश्वर को स्वीकार करता है, आस्तिक का अर्थ है जो स्वीकार में जीता है। आस्था में जीए, वह आस्तिक। अनास्था में जीए, वह नास्तिक। साधारणत: सौ में से निन्यानबे प्रतिशत लोग नास्तिक हैं। क्योंकि नहीं उनके जीवन का ढंग है। हर बात में नहीं। नही...
कभी टेलीफोन बूथ पर काम करता था , आज है। Comedy King है। || KAPIL SHARMA BIO-GRAPHY ||TKSS
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कभी टेलीफोन बूथ पर काम करता था , आज है। Comedy King है। || KAPIL SHARMA BIO-GRAPHY || कभी टेलीफोन बूथ पर काम करता था , आज है। Comedy King है। “क्या आप हँसना चाहेंगे ??” “क्यों नहीं !! यदि हंसाने वाला Kapil Sharma हो तो ।” “आप ऐसा ही कहेंगे, हैं ना ?” हमेशा सबको हंसाने वाले Kapil Sharma की साधारण-सी दिखने वाली जिंदगी यूं आसान ना था। अपने परिवार की मदद करने के लिए उन्हें बचपन में कपड़ा मिल में काम करना पड़ता था। पिता जब कैंसर से पीड़ित हुए तो उनकी जिंदगी और कष्टों में गुजरने लगा। पर हिम्मत नहीं हारा। दिल में – मन में अपने सपने को जिंदा रखा । मुंबई आया, संघर्ष किया और छा गया। तो आइये मित्र इस Hindi biography के द्वारा Kapil Sharma के जिंदगी के अलग-अलग भागों को करीब से जानते है… Kapil Sharma का Childhood & Parents कपिल शर्मा का जन्म अमृतसर के एक लोअर क्लास फैमिली में हुआ था। उनके पिता पंजाब पुलिस में हेड कॉन्स्टेबल थे। पर कैंसर से लंबी लड़ाई लड़ने के बाद 2004 को वे सफदूरजंग अस्पताल, न्यू दिल्ली में अंतिम सांस ली। कपिल की माँ हाउस वाइफ़ है।...
वास्तविक धर्म क्या है?-What is real religion?
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वास्तविक धर्म क्या है? ओशो काश पूरी धरती पर यदि धार्मिकता फैल सके तो सारे धर्म विदा हो जाएंगे! और यह मनुष्य जाति के लिए एक महान वरदान होगा, जब मनुष्य केवल मनुष्य होगा-न ईसाई,न मुसलमान,न हिंदू सच्ची धार्मिकता को मसीहाओं, उद्धारकों, पवित्र-ग्रंथों, पादरियों, पोपों और चर्चों की कोई आवश्यकता नही हैं। क्योंकि धार्मिकता तुम्हारे हृदय की खिलावट है। वह तो स्वयं की आत्मा के, अपनी ही सत्ता के केन्द्र बिंदु तक पहुंचने का नाम है। और जिस क्षण तुम अपने अस्तित्व के ठीक केंद्र पर पहुंच जाते हो, उस क्षण सौंदर्य का, आनंद का, शांति का और आलोक का विस्फोट होता है। तुम एक सर्वथा भिन्न व्यक्ति होने लगते हो। तुम्हारे जीवन में जो अंधेरा था वह तिरोहित हो जाता है, और जो भी गलत था वह विदा हो जाता है। फिर तुम जो भी करते हो वह परम सजगता और पूर्ण समग्रता के साथ होता है। मैं तो बस एक ही पुण्य जानता हूं और वह हैःसजगता। ये विभाजन, ये सीमाएं, ये भेद पूरे इतिहास में हजारों-हजारों युद्धों...
नौकर के साथ उदार व्यवहार-Generous dealings with the servant
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नौकर के साथ उदार व्यवहार कोताराकान्त राय बंगालके कृष्णनगर राज्यके उच्च पर नियुक्त घे। नरेश उन्हें अपने मित्रकी भाँत मानते बत समयतक तो वे राजभवनके ही एक भागमें करते थे। उस समय जाडेकी ऋतुमें एक दिन बहत अधिक रात बीतनेपर अपने शयन-कक्षों पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि उनका एक पुराना सेवक उनकी शय्यापर पैतानेकी और सो रहा है। श्रीरायने एक चटाई उठायी और उसे बिछाकर चुपचाप भूमिपर ही सेगये। कृष्णनगरके नरेशको सवेरे-सवेरे कोई उत्तम समाचार मिला। प्रसन्नताके मारे नरेश स्वयं श्रीरायको वह समाचार सुनाने उनके शयन-कक्षकी ओर चले आये। नरेशने उनका नाम लेकर कुकाय, इससे रायमहोदय हड़बड़ाकर उठ बैठे। जयापर मोया नैक भी बाग गया और डरता हुआ दृर खड़ा हो गया। । राजाने समाचार सुना से पहले यूछा-'गाय महालय यह क्या बात है? आप भूमिपर मोटे हैं और मंत्र शव्यापर।' । रायने कहा-' राठमें लंय तो वह जयमाले पैताने सो गया था। मुझे लगा कि इसका स्वम टीक नहीं होगा अथवा यह बहुत अधिक थक गया होगा काम करते-करते। शव्यापर तनिक लेट ही नोट आ गयी होगी। जगा देनसे इसे का होता और चाईना में जानेमें मुझे कोई असुविधा भी नहीं।'