लेकिन कैसे बुद्ध जी..कैसे अप्प दीपो भव ? कृपया बुद्ध के प्रसिद्ध वाक्य ‘अप्प दीपो भव’ का मतलब समझायें और ये भी बताएं कि जो पहला आत्मज्ञानी हुआ होगा । उसका गुरु कौन था ? कृष्णमुरारी शर्मा । पूरा धार्मिक वितण्डा वाद लोगों को भयभीत करने पर आधारित है । ---------------------- अप्प दीपो भव - अपने दीये स्वयं बनो..अप्प दीपो भव का ये अर्थ मैंने एक जगह लिखा देखा पर मैं इससे सहमत नहीं हूँ । अप्प - आप, दीपो - दीपक, भव - होना या प्राप्ति । भव संस्कृत का शब्द है और संस्कृत शब्दकोश में इसके अर्थ - जन्म, शिव, बादल, कुशल, संसार, सत्ता, प्राप्ति, कारण, कामदेव हैं पर मैं किसी भी भाषा के पचङे में पङने के बजाय सरल सहज मार्ग का सदैव हिमायती हूँ । इसलिये प्रसिद्ध और आसान वाक्यों में इसका प्रमाण देखता हूँ । देखिये - आयुष्मान भव, कीर्तिमान भव, दीर्घायु भव । अब बङे आराम से समझ में आता है कि आशीर्वाद में भव का अर्थ - होओ निकला, बनो नहीं । क्योंकि इसका अर्थ बनने से करें तो फ़िर ये सलाह हुयी, आशीर्वाद कहाँ हुआ ? तुम बनो । और पागल से पागल भी जानता हैं कि दीर्घायु और यशस्वी होना अच्छा है फ़िर ...
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