**450 मेरा सैया खो गया री।।


मेरा सैयां खो गया री, अलबेला खो गया री।
                 मोह माया के व्यवहार में।।
सास मेरी लीपे ननद लिपवावे, 
                अलबेला लीपे री, वो लीपे गोबर गार में।।
काशी भी ढूंढा मथुरा भी ढूंढा,
               कनखल में ढूंढा री, वो ढूंढा हरिद्वार में।।
जल में भी ढूंढा थल में भी ढूंढा, 
               इस दिल में ढूंढा री, वो ढूंढा सब संसार में।।
 कह कबीरा मस्त फकीरा, 
               गुरु ज्ञान गंभीरा री, वो पाया सुन्न भंडार में ।।         

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