*1147. तनै तो मेरा पिया मोह लिया हे।।508।।

                                  508
तनै तो मेरा पियामोह लिया हे, सुन चटक चुनड़ी आली।।
       माली ने एक बाग लगाया, बीच लगाई फुलवारी।
      औरै धोरै खिल रही क्यारी, फूलों की छवि न्यारी।।
चुन चुन कंकर महल बनाया, बिच बनाई अलमारी।
औरै धोरै खुल रही झाँकी, छज्जे की छवि न्यारी।।
       मलमल के तनै काया धोई, अद्भुत खूब सजाई।
       स्वर्ण काया माटी होगी, या अग्नि बीच जलाई।। 
क्यूँ तूँ चालै अकड़-२ के, कहता कुनबा भारी।
एक दिन तोता उड़ ज्यागा, यो लेज्या हंस उडारी।।
     कह कबीर सुनो भई साधो, मत बन तूँ अभिमानी।
     तूँ मत कर मेरा मेरी पगले, साथ नहीं कुछ जानी।।


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