*1439। तेरे दुख काटे अविनाशी।।629पी।।
तेरे दुख काटे अविनाशी यह है बेगम पुर के वाशी।
रटना रट लियो शाम सवेरे गुरु के नाम की।।
मीरा तार कमाली तारी, तारे सजन कसाई।
भवसागर से पार करेंगे तेरे सतगुरु दाई।
बंधन काट देवें सत्संग में, रंग ले अपने रंग में।।
नामदेव की गाय जीवाई ऐसे हैं दातारा।
भीलनी के बेर खाए राम ने, कर दी भव से पारा।
चौकी तोड़ बगाइ यम की, हमे फिक्र नहीं उस गम की।।
सिकंदर जी गए जेल में, चक्की खूब चलाई।
हार मान गया लोधी सिकंदर से, चरणों में शीश नवाई।
संतों की लाज बचाई, दिया आत्मज्ञान कराई।।
राम लक्ष्मण ने प्रकट होकर निर्गुण भक्ति कमाई।
कस्बा उन में खुला गुरुद्वारा, सत की राह चलाई।
झुक गई वहां दुनिया सारी, सतगुरु की महिमा न्यारी।।
संत शिरोमणि रविदास चरण में, गुरु गांधी सुख पाए।
गुरु समन दास बेगम के वासी, वो ही देश बताएं।
विजय ज्ञान गुरु के प्यारे, वे हुए दुनिया से न्यारे।।
Comments
Post a Comment