*1460. जिसको नहीं है बोध तो गुरु ज्ञान क्या करें ।। 639

जिसको नहीं है बोध तो, गुरु ज्ञान क्या करें।
निज रूप को जाना नहीं पुराण क्या करें।।

घट घट में ब्राह्म ज्योत का प्रकाश हो रहा।
मिटा ना द्वैतभाव तो फिर ध्यान क्या करें।।

रचना प्रभु की देखके ज्ञानी बड़े-बड़े।
भावे ना कोई पार तो नादान क्या करें।।

कर के दया दयाल ने मानुष जन्म दिया।
बंदा ना करे भजन तो भगवान क्या करें।।

सब जीव जंतुओं में जिसे है नहीं दया।
ब्रह्मानंद वर्त नेम पुण्य दान क्या करें।।

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