*1461 ज्ञान दे दीन्हा गुरुदेव ने मेरे दिल का भरम मिटा दिया 640।।

ज्ञान दे दिनहा गुरुदेव ने मेरे दिल का भरम मिटा दिया।।

जाता था देखने को जिसे मथुरा बनारस द्वारका।
सोई चेतन देव को घट में मेरे दिखला दिया।।

जिस नजर से जगत को मैं देखता था जुदा जुदा।
जिया जून अनेक में मुझे एक रूप बता दिया।।

जगत सांचा मान के फिरता था मैं भटका हुआ।
स्वपन समान विचार के सब नाश स्वरूप जता दिया।।

सुख-दुख भूख प्यास जीवन मरण धर्म शरीर के।
ब्रह्मानंद स्वरूप को करके जुदा तरसा दिया।।

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