*1440. म्हारे साधो भाई सुनो जी बात अगम की।
म्हारे साधो भाई सुनो जी बात अगम की।।
सहस कंवल दल त्रिकुटी मंडल, वहां पर बैठक यम की।
लाख जतन कर चल आगे को मेटो चोट सघन की।।
बिन पानी वहां ताल भरे, बिन बादल दामिनी दमकी।
बिन तरवर वहां बाग लगे है कोयल बोले वन की।।
आगे चल के देख प्यारी एक ज्योति सी चमकी।
हीरे मोती लाल जड़े हैं खान खुली वहां धन की।।
वहां पर चलकर आनंद देखा सुरती पहुंची जिनकी।
ताराचंद कौ गुरु अरमान मिले, सब मेटी बातें विघ्न की।।
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