*1541. मेरे हनसा भाई यू होता है आत्मज्ञान।।

मेरे अंसा भाई न्यू होता है आत्मज्ञान।।

संकल्प विकल्प मनके छोड़ो, तज देना अभिमान।
गुरु वचन पर डट के चालो कट जा पाप तमाम।।

ब्रह्म मुहूर्त में सोकर जागो फिर करना चाहिए स्नान।
आसन उकड़ू लाके बैठो सूरत चडे आसमान।।

छठे चक्कर से नाम उठाओ रखो बंद जुबान।
थोड़ा सा तुम भोजन जीमो खूब लगेगा ध्यान।।

धीरे-धीर आगे चालो, पहुंचो पद निर्वाण।
वहां परियोजन तख्त पिता का, वहां पर मौज महान।।

उदर समाना टुकड़ा जीमो, तज दो रस तमाम।
पांच विषयों को वश में रखें वही है बलवान।।

सच्चे सतगुरु हमको मिल गए राम सिंह अरमान।
ताराचंद से भोला भाला हरदम जपते नाम।।

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