*1495. सतगुरु मिलने चालो हेली, करो ना सिंगारो।।655।।

                            655
अरथ सिंगारों हेली सेज सिंगारो।
सतगुरु मिलने चालो हेली, करो ना सिंगारो।।

गम का घाघरा पहर सुहागिन नेम का नारा घालों।
करमा गांठ जुगत से लालो, लोग हंसे जग सारो।।

चेतन चुनरी ओढ़ सुहागन नेम से गाती मारो।
लाज शर्म का कार्ड घुंघटा कुल लजेगो थारो हे।।

और पिया म्हारे दाए ना आवे, अमर पिया घर म्हारो हे।
उन्हीं पिया से लगन लगी है, तनिक ना हो पिया न्यारो हे।।

नाथ गुलाब मिला गुरु पिया दीया शब्द का सहारो हे।
भानी नाथ शरण सतगुरु की सहजे मिला किनारों हे।।

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