शब्द लिस्ट सितंबर नई लेटेस्ट।।

                        ।।गुरु वंदना।।     
* काहे की भेंट चढ़ाऊं गुरु थारे।।2।।
*किस पर मैं जान तुमने तो छोड़ दाता जी।।6।।
* एक नाम लग जाऊं गुरुजी थारे।।15।।
*नमो नमो म्हारे गुरुदेव को।। 68।।
* सारे तीरथ धाम आपके चरणों में।। 14।।       
* गुरु जी थारी महिमा भारी है।। 4।।
*म्हारे गुरु के चरण की धूल मस्त लग रही ।।7।।
*गुरु के समान नहीं दाता रे जग में।।3।।
* गुरु के समान नहीं दूसरा जहान में।।3।।
* गुरु के समान दाता और ना जहान में।।4।।
*गुरु के समान दाता कोई नहीं है जग मांगन हारा।।4।।
*गुरु भजा सोई जीता रे जग में।।
*गुरु के चरणों में धरो ध्यान।।5।। 
*हमारा दाता अपने ही उर में पाया जी।।8।।
*मेरे बिछड़ गए दिलदार कोई मुझे मिला दे उनसे।। 55।।
*तुम सुनियो दयाल म्हारी अर्जी।। 10।। मीरा।।
*गुरु सुनियो अरज हमारी।। 22।।
*गुरु जी औड़ निभाइयों मेरी।।2।।11।।
            मुझ पर दया करो महाराज।। 125।।
*मेरा कोई ना सहारा बिन तेरे।। 40।।
*आया मैं थारी शर्ना गुरुजी।।30।।
*चाहे भूल जाए गुरुवर सारा जमाना।।11।।
*गुरु कर दो बेड़ा पार हो जा दया थारी।।8।।
*गुरु कर दो बेड़ा पार जिस पर दया थारी।। 8।।
*गुरु हमको पार लगाओ जी।।4।।
*सतगुरु मैं तेरी पतंग।।36।।
*गुरु का शर्ना ले भाई।। 26।।
*गुरु का नाम रटो भाई थारी बिगड़ी बात।।
*म्हारे गुरु गोविंद बताया है।। 24।।
*आज म्हारे रंग बरसे सतगुरु आए।।28।।
*आज तो आनंद म्हारे सतगुरु आए।।36।।
आज म्हारे अंगना में साधु जन आए री।37।।
*आज मेरे सतगुरु को घर लाऊं।।5।।
*भला हे दिन उज्ञा मारे सतगुरु आए आज।।2।।7।।
*मेरे सतगुरु पकड़ी बांह नहीं तो मैं बह जाता।।5।।
*मेरे सतगुरु पकड़ी बांह नहीं तो मै बह जाती।।6।।
*अब कोई गुरु चरण चित लावे।।15।।
*सतनाम 3 बोल जय करुणाकर।।13।। 262।।
*बंदे सतगुरु सतगुरु बोल तेरा क्या लागे।।36।।
*अन घडिया देवा कौन करेगा थारी सेवा जी।।12।।
*3देखो रे भाई अपने स्वामी का नूर।। 244।।
*गुरु बिन घोर अंधेरा रे साधु भाई।।10।।
*सत गुरु बिन घोर अंधेरा सब भरम मिटा वे।।35।।
*आनंद के लुटे खजाने।। 41।।
*गुरु चरणों से प्रीत ना जोड़ी।।5।।
गुरु बिन कौन विपत हरे भाई।।45।।
*गुरु बिन तेरो कौन सहाई है।।7।।
गुरु बिन कौन सहाई तेरा गुरु बिन कौन सहाई।। 10।।
*गुरु बिन धक्के खाओगे।।10।।
*गुरु बिना मुक्ति ना होएगी रे मन चंचल।।11।।
*गुरु बिना मुक्ति ना चाहे करले जतन हजार।।11।।
*गुरु बिना ज्ञान नहीं जी, मुक्ति कैसे पाओगे।।12।।
*गुरु बिन कौन बतावे बात।।12।।
*गुरु चरण लगा रहे सोई शीश सियाणा।।7।।
*गुरु जी हमने अवगुण बहुत करें।।6।।
*गुरु हमारे ने दिन्ही है ज्ञान जड़ी।।5।।
*गुरु चरण कमल बलिहारी मेरे मन की।।1।।
*गुरु ने झीनी वस्तु लखाई।।4।।
मेरा कोई ना सहारा बिन तेरे गुरुदेव सांवरिया।।1।।
तेरी मेहरबानी का है बोझ इतना।।33।।
*गुरु वचनों को रखना संभाल के।।19।।
*ले गुरु का नाम बंदे यही तो सहारा है।।36।।
*नाम लखा दीजो थारे।।17।।
नाम गुरु का जप ले बंदे।।35।।
*नाम गुरु का जप ले बंदे फिर पीछे पछतावेग।। 36।।
*नाम की जड़ी रे, हरी नाम की जड़ी।।16।।
*तेरा जन्म मरण मिट जाए गुरु का नाम रटो प्यारे।।5।।
मेरी गुरु बिना लागे ना अखियां।।41।।
*हमने गुरुजी मिलन को घणों चाव।।13।।
*जन्म लिया ना लिया गुरु के बिना।।14।।
*मिलते नहीं है भगवान गुरु के बिना।।18।।

                  शरणागत गुरु की।।
सतगुरु पूरा जो मिले।। 263।। 
*मैं थारे चरण का दास सतगुरु म्हारे आप धनी।। 35।।
गुरुदेव दया करके मुझको अपना लेना।।18।।
मेरे सतगुरु काट जंजीर जीवड़ा।।37।।
तूही तूही याद मोहे आवे रे दर्द में।।35।।
सतगुरु मिले म्हारे सब दुख मिट गए।। 274।।

                 चेतावनी शब्द।।
मोको कहां ढूंढे रे बंदे मैं तो तेरे पास में।।।8।।
भाई कर गुरु से प्यार तेरा वक्त निकलता।।13।।

                  बीन।।2।।
*गुरु ने बीन बजाई मेरा मन पकड़ा।।9।।
*ऐसी कौन सपेरन आई रे।।9।।           
        
                  भजन।।
रोज थोड़ा थोड़ा साहेब का भजन कर ले।।
*भजन बंदगि कर सतगुरु की।। 108।।
*भजन बंदगी कर सतगुरु की।। 76।।
*भजन बंदगी कर सतगुरु की।। 75।।
*भजन कर राम दुहाई रे।। 22।।
*भजन करो भाई रे ऐसा तन पाए के।।14।।
*भज ले राधास्वामी नाम तेरे काम आएगा।। 36।।
*भजन के बिना रे बंदे तेरे बैल है लदनिया।।47।।
*कभी किया ना भजनवा कैसे बीतेगी।। 44।।
*तू कर भजन भगवान का इंसान बावले।। 48।।
*कर भजन बंदगी बंदे।। 75।।
*कर बंदगी और भजन धीरे धीरे।।38।।
थे ऊपर ने पैर तले ने सिर तेरा।। 38।।
*भक्ति भजन फिर करना पहले।। 133।।
*तेरा जीवन है बेकार भजन बिन दुनिया में।।38।।
*एक हरि के नाम बिना पर ले में।। 40।।
*हरिओम के भजन बिना तू क्यों कर।। 39।।
*हर में हरी को देखा।।22।।   
*करो हरी का भजन या मंजिल पार हो जागी।।17।।
*राम नाम पूंजी पल्ले बांधो रे मना।।23।।
*राम भजन की बरिया।। 67।।
*तूं राम सुमर ले मंजिल दूर पड़ी।। 37।।
*मेरा रह गया राम मिटा रगड़ा।।19।।
*राम सुमर ले सुकृत करले आगे आडो।।19।।
*राम सुमर ले सुकृत करले को जाने।।20।।
*राम सुमर राम तेरे काम आएगा।। 1।। 41।।
*राम गुण गायो नहीं आए करके।।24।।
*राम कहो आराम मिलेगा सही रटन की।। 44।।
*नाम से मिला ना कोई।। 260।।
*भाई तू राम नाम चित् धरता।। 44।।
*तू भज ले हरी का नाम तेरे काम आएगा।। 62।।
*नाम हरि का जप ले बंदे।। 58।।
*आजा बंदे शरण राम की फिर पीछे पछतायेगा।।30।।
*हरी नाम का सुमिरन करले क्यों राह में।।20।।
अरे सुन बुलधा वाले हरि ने सुमर।। 258।।
*रट ले हरि का नाम रे बैरी।। 18।।
*बंदे हरि का गुण नहीं गाया।। 17।।
*किस विद हरि गुण गाऊं अब मैं।।22।।
*हरि नाम सुमर मन मेरा तेरा जन्म।।2।।
*हरि का ध्यान धरो भाई थारी बिगड़ी बात।।25।।
*गुरु का सरना ले भाई भारी बिगड़ी बात बन जाए।।26।।
*हरी के भजन कर ले रे दरसेगा नूर।।23।।
*हरि तेरो अजब निरालो काम।। 19।।
*हरि भजन बिना सुख नाही रे।।2।।
*हरि भजले जन्म सुधर जाएगा।।1।।
*हरि भज हरि भज हीरा परख ले।। 66।।
*हरि बिना यहां कोई नहीं तेरा।। 63।।
*हर मैं हरी को देखा।।6।।
*मुझे है काम ईश्वर से जगत रूठे।। 25।।
*ईश्वर से करते जाना प्यार ओ नादान।।24।।
*बंदे रट ईश्वर की माला क्यों नर जुलम।। 20।।
*इश्क करे तो कर हरि से।।27।।
*तेरे द्वार खड़ा भगवान भगत।।42।।
*हे भगवान पता ना पाता।। 15।।
*हे भगवान तेरी माया का भेद कोई।।14।।

                             सीर।
*बूडली सुमिरन करले पड़े भजन में सीर।।25
*भाई साधन कर ले पड़े भजन में सीर।।25।।
*संगत कर ले गुरुदेव की पड़े भजन में सीर।। 50।।

                       अवसर मौका।।
*मत अवसर खोवे हे ना जागी बाजी हारी।। 157।।
*ऐसा अवसर बार-बार नहीं आवे।। 194।।
*अवसर बहुत भला रे भाई।। 169।। 23।
                     सद्गुरु के बिना।।
*सतगुरु के बिना मार्ग कौन बतावे।। 46।। 263।।
*सतगुरु के बिना तेरा कौन से हिमाती।। 45।।।
*सतगुरु के बिना कौन रास्ता खोले।। 45।।
*सतगुरु के बिना भरम मिटावे ना कोई ।।49।।
*सतगुरु के बिना राह न पावे कोई।। 49।।
सतगुरु मेरा मरहमी।। 264।।
*गुरु थारे बिना बिगड़ी ने कौन सवारे।।46।।
*ज्ञान बिना मनुष्य बने हैं ढोर।।46।।
*भजन बिना व्यर्थ ही ऊंट बढे।।47।।
*भजन बिना फिरें जा लाख चौरासी।।47।।
*भजन बिना कोई ना जागे रे।।47।।
*यतन बिना मृगा ने खेत उजाडा।।48।।
*खसम बिना तेली का बैल भया।। 30।।
*गरज बिना कोई नहीं रे प्यारा ।।48।।

                        धीरज।।4।।
*गुरु के बिना कौन बंधावे मारी धीर।।71।।
*धीरा रे मन धीरा पाया नाम पदार्थ हीरा।।71।।
*धीरज क्यों ना धरे रे कंगले मन।।71।।
*धीरज क्यों ना धरे रे लोभी मन।।72।।

                      12 धन माया।।
ले जोड़ नाम की माया।। 
*या माया कमा कमा धर ली।।
*धन जोबन और काया नगर की।। 213।।
*संग ना तेरे माल खजाना जाएगा।। 73।।
*धन माया रंग रूप का।। 195।।
*जागो रे माया का लोभी।। 83।।
 *जोड़ जोड़ धर ले जितना बस जोड़।।82।।
*जोड़ जोड़ भर लिए खजाने।। 81।।
*एक दिन ऐसा आएगा धन दौलत और।। 197।।
*के के रूप धरा माया ने।।72।।
*अरे बंदे क्यों नारायण को भूला।। 43।।
*जित देखूँ उत माया बैठी।। 71।।
*करके माया का संजोग लोग सब।। 73।।
*या माया जोर जमावे रे या माया प्रपंचनिया।।72।।
*हे तूं पांच ठगों ने पगली, तने भजन करा ना पगली।।73।।
*हे री हे री ठगनी कैसा यो खेल रचाया।।75।।
*हे माया ठगनी है तूने लूट लिया जग सारा।। 76।।
*तेरे जीवन के दिन चार मत फंसे सहेली।। 76।।
*माया मोहनी रूप धरे।। 71।।
*इस माया ठगनी ने लूट लिया मेरे राम।।76।।
*ठगिनी क्यों नैना झमकावे।।73।।
*ठगियों की नगरी फस गया।। 99।।
*नाना रूप धर मोहे या माया ठगनी।।73।।
*माया हे रंग बादली जा में चंद भी।।74।।
*तूने तो मेरा पिया मोह लिया है।।74।।
*तने माया रे बटोरी हरी नाम नाम लिया।।80।।
*तूने सुमरा ना हरी नाम मोह माया के चक्कर में।।77।।
*तूं चाली जा हे मार्ग अपने को।।74।।
*यह कैसी अद्भुत माया।।77।।
*अरे तू दुनिया में आया जब से करी मनमानी।।79।।
*संग चले सोई धन है साधु।।79।।
*माया को मजूर बंदों कहां जाने बंदगी।।79।।
*ममता तू न गई मेरे मन से।।80।।
*बना है क्यों पुतला मोह जाल का।। 78।।
*मोह माया ने छोड़ क्रोध ने तज रे।। 77।।
*मोह माया की नगरी को छोड़ के।। 73।।
*ऐसी करी गुरुदेव दया।। 74।।
*इस मोह माया की धार में।। 77।।
*क्यों काया भटकावे माया।। 80।।
*तेरी माया है अपरंपार।। 74।।
*जिसकी लेकर आई पूंजी उसने क्यों कर।।77।।
*डर लागे और हंसी भी आवे।।79।।
*किस भूल में दीवाना हुआ रे।।72।।

                मीराबाई शब्द।।
*मेरा हुआ गुरु से प्यार बधाई बाटूंगी।।46।।
*पपीहा बेरी रे पिया पिया मत बोल।। 32।।
तेरा मन क्यों कर लग गया है।। 55।।
*चांदी की दीवार को तोड़ा।। 57।।
घर कुनबे का ख्याल रहा ना।। 52।।
*तूने खबर नहीं ससुराल की।। 148।।
*कोई कुछ भी कहो रे मन लाग्या।। 58।।
*पिया के फिक्र में भई मैं दीवानी।। 278।।
*मैंने गुरु मिले रविदास सासरे।।51।।
*कब आओगे गुरूजी म्हारे देश।।54।। 56।।
*सैंया जी मैं लूट ली वैराग्य ने।।55।।
*तुम म्हारी भी बनाई हो महाराज।।55
*तुम फलक उगा हो दीनानाथ मैं हाजिर नाजिर।।56।।
*कोई कहियो रे गुरु आने की।। 56।।
*गुरु की लाडली है तू क्यों ना प्रेम बढ़ावे।।56।।
*मेरा मन बैरागी हुआ री मेरी मां।। 57।।
*मीरा बैरागन हो गई रे बाली उमर में ।।57।।
*मीरा जोगन बन गई रे श्याम तेरी मस्ती में।। 57।।
*मीरा दीवानी हो गई रे।। 53।।
*मंदिर जाती मीरा ने सांवरिया।। 55।।
*मेरा दर्द ना जाने कोई।। 55।।
*मेरे सतगुरु चेतन चोर मेरा मन।।51।।
*मेरे सिर पर मटकी पाप की।।51।।
*मतवाली मीरा सत्संग करती डोले ।।52।।
*मेरी वृंदावन ससुराल में राणा की।। 52।।
*गले में माला बनी भगतनी।।53।।
*कठिन सांवरे की प्रीत लागे सोई जाने।। 53।।
*इसी फिक्र में मेरा ही रे बावली।। 53।।
*काला काला नाग हे मीरा।।54।।
*बाजा बाजा री मा अनहद तुरा।। 262।।
*हे मीरा हम हो जाएंगे बदनाम।। 50।।
*मीरा तेरी हो गई उम्र जवान।। 50।।
*या मीरा याद करे दिन-रात।। 68।।
*राणा जी तेरे महलों में आग लगे।। 51।।

                   सजनी।।
*मंदिर में क्या ने ढूंढती डोले।।56।।
*तुम तो सह मैली सी नार पिया तो तेरा उजला है। 151।।
*इसको जगा ले सजनी पिया सोवे हैं अटारी।।56।।
*सखी री पड़ी अंध के कूप।। 52।।
*सजनी घट के परदे खोल।। 52।।
*बाहर ढूंढत जा मत सजनी।। 49।।
*जगा ले सजनी बन्ना सोवे हैं अटारी।। 53।।34।।
*कदे बाप के कदे पति के न्यू के।। 112।।
*तेरा मंदिर मेला है इसमें राम।। 59।।
*आई सत्संग में जीत आई जंग में।। 49।।
                   सुहागिन।।
*सुहागिन मैं तो हो ही गई मेरा जिस दिन मरा भरतार।।171
*मन का मरन लगा परिवार।।171।।

                  कमाली।।
*मेरी गुरुवा बिना लागे ना अखियां।।41।।
*मैं ना लड़ी मेरा पिया डिगर गया जी।।23।।
*घूंघट के पट खोल री।।31।।
*पी पी मत ना बोल पपिया री।। 32।।
*मेरे मालिक बिना दर्द कालजे होय।।

                नित्यानंद महाराज शब्द।।
*दिल दे दिया सतगुरु प्यारे नू।।
*समर्थ साहिब दया करो गुरु मेरा।।70।।
*लागी थारे पाया राम।। 67।।
*क्यों कर मिलूं पिया अपने को।।61।।
*मस्ताना मस्ताना कोई जन।। 63।।
*कैसे हो हरि मेला रे।। 63।।
*नित्यानंद छिक रहे नूर में।। 67।।
*तन मन शीश अपने को।। 67।।
*नमो निरंजन3 स्वामी।। 68।।
*नर जन्म अमोलक खोया रे।। 64।।
*सुख के सागर प्यारे हमारी सुध लीजे।। 66।।
*प्रभु जी दीजो दर्श सुखार।। 66।।
*मेरे हिवरे में बस गए रामा 68।।
*पीया क्यों ना ली हो खबरिया हमारी।।
*मेरे मन बस गयो ही सुंदर सजन ।।69।।
*मेरे मन बस गयो री, वह नटवर नंद का लाल।। 70।।
*हो विदेशी प्यारे मेरी अखियां जोहवे बाट।।69।।
*प्यास दरस की लाग रही कोई रमता राम मिलावे।।70।।
*तेरों दोजख दोष मिटा ले।।66।।
*मारे प्रेम संदेश ईगुरु आए।।
*हरि प्रीतम से प्रीत लगा के।।

                  सुमिरन।।
*फिर तुम कब सुमरोगे नाम।।185।।
*सत्य नाम का तूं सुमिरन करले।।32।।
*करले समरन घड़ियां चार।।42।।
*नाम का सुमिरन करके देखो जीते जी।। 42।।
*राधास्वामी नाम सुमर मन मेरा5।। 101।।
*मैं  तो इस विद सुमिरन कीन्हा।।32।।
*वह सुमिरन एक न्यारा रे साधु भाई।।31।।
*तेरा दांव लगा है खूब सुमिरन करले।। 12।। 42।।

                         अमल ।।3।।
*कोई होवे अमली सतगुरु के नाम का।। 41।।     
*अमल निज नाम का मेरे दाता।। 40।।
*हम अमली निज नाम के।।40।                 
                                  नाम।।5।।
*अविनाशी2 मने तो तेरे नाम का भरोसा।।38।।
*तेरे नाम पर आशिक हो गए और किस पर।।24।।
*कब हूं ना मैला होई नाम धन।।32।।
*कर दो नाम दीवाना गुरुजी।। 16।।
*तनिक ना थोड़ा जाए नाता नाम का जी।। 53।।40।।
*नाम निरंजन नीका साधु।। 31।।

                      दर्शन।।5।।
*जिस दिन गुरूजी तेरा दर्शन होगा।।3
*सतगुरु दर्शन दो चित चोर।।28।।
*दर्शन सदा राम मोहे दीजे।। 69।।
*मैं तेरा दीदार दीवाना।। 67।।
*मैं दर्शन की प्यासी, मेरे सतगुरु।। 64।।

                         सत्संग।।16।।
*भाग्य बड़े सत संत पधारे।।
*तन मन के मिटे विकार, जिसने पाया सत्संग सखी।146।।
*सत्संग वो गंगा है, इसमें जो नहाते हैं।।29।।
*सत्संग सा तीरथ कोई नहीं।। 25।।
3सत्संग गंग की धार में मलमल।। 30।।
*सत्संग नाम की गंगा है।। 29।।
*सत्संग गंग की धार में।। 29।।
*सत्संग करते बहुत दिन बीते।। 28।।
*लागे ना सत्संग प्यारा वो नर।। 31।।
*भाई सत्संग हो रहा सच्चे गुरु के दरबार।। 33।।
*ला के फुर्सत दो घड़ी।। 39।।
*ब्रह्म सब में एक समान।। 39।।
*भाग्यवान घर होवे सतगुरु के दर्शन।।1।।
*भागवान घर होवे साधुओं का सत्संग।।
*सत्संग में आकर पापी पार हो जाते।।29।।
*सत्संग करने से बहुत घने हुए पार।।34।।
*देखी अजब निराली महिमा सत्संग की।।29।।

                          रत्न।।15।।
*जप ले हरि का नाम वक्त गवाई ना।। 81।। 
*मृगा नाभि में कस्तूरी खोजें जंगल।। 47।।
*मैंने पाया नगीना सतगुरु मिल गया पूरा।। 35।।
*तूने मिला यो हीरा कीमती।। 197।।
*मेरा हीरा खो गया कचरे में।। 104।।
*इस सत्संग रूपी लाल की।।81।।
*तेरा किसने लाल चुराया दर खुले।।81।।
*अंदर अनमोल अरे लाल हरदम माला।।82।।
*म्हारे गुरु ने दई से बताएं दलाली।।82।।
*बनज कैसे किया रे मेरे लालों के व्यापारी।।82।।
*मोतिया बरसे रे साधु हमारे देश दिन रात।।83।।
*मैं पापन रही सोती लूटे हरि नाम के मोती।।83।। 
*जन्म तेरा हीरा है आज तू ऐसे गवाए।।83।
*भाई तेरा चोला रतन अमोला।। 83।।
*अपने हाथों फांसी घालें क्यों अक्ल पर।।84।।

            

                           कर्म।।10।।
*धर्म-कर्म दिए त्याग लोभ ने तो गर्स लिए।।163।।
*करे तो शुभ कर्म कर ले।।187।।
*मत बुरे कर्म कर बंदे।।187।।
*सतगुरु के बिना भाई कटते ना कर्म क्लेश।।27।।
*मैं ना लड़ी मेरा पिया डिगर गया जी।। 23।।
शुभ कर्म कर सुख मिलेगा दुख निशानी।। 27।।
या कर्मों की रेखा टाली नाही टले।। 185।।
*मैं तो हार गई मेरे राम धंधा करती।।28।।
*मैं तो माड़ी हो गई राम।। 46।।
*सासुड ताना मारे, ननदल भाइडो बीर।।30।।

                         भेद।।2।।
पाया है अब पाया है, म्हारे सतगुरु।।16।।
*हे भगवान तेरी माया का।। 14।। 
*साहिब तेरा भेद ना जाने कोई।। 266।।

                      भरम।।
*झूठ बराबर पाप नहीं सच बराबर तप कौन्या।13।।
*भटकता क्यों फिरे बन बन अरे नादान परदेसी।।100।।
*क्यों भ्रम रहा संसार में तेरा भरम तुझी में भाई।।84।।
यो कितना बड़ा झमेला या दुनिया भरम का मेला।172।।
*किस भूल में दीवाना हुआ रे।। 72।।
*हरदम याद करो सतगुरु ने।।83।।
सुन लो चतुर सुजान नुगरा ना रहना।। 89।।
*बंदे सोच समझ के चाल।। 173।।
*दुई ने छोड़ एक होले तू अपना रूप ल्हको ले।। 245।।
*गलती है तेरे हिसाब में।। 289।।
कदरदान मानस के आगे।। 305।।
*दिया है भरम गढ़ तोड़ मैं वारी जाऊं।। 258।।7।।
*सत गुरु बिन घोर अंधेरा सब भरम मिटावे।। 11।।
*मैं वारी जाऊं सतगुरु के मेरा दिया।।10।।
*देखो रे लोगो भूलभुलैया का तमाशा।। 186।।
*जा टूट भरम के ताले।। 172।।
*कौन सुने कौन माने कुएं भांग पड़ी।। 172।।
ऐसा ऐसा ख्याल विचारों भाई साधो।।266।।
अटल फकीरी धुन लाए छोड़ दे लटक सारी।।32।।
*नाम बिन भरम कर्म नहीं छूटे।।31।।
*गुरुओ ने आन जगाई हे सखी मैं तो भूल भरम में।।37।।
*निंदक यार हमारा रे साधु।। 316।।         
  
                     पाखंड।।
*/पाखंड में कुछ नाही रे साधु।। 183।।
*पाखंडी दुनिया कहो ना कैसे तरिया।। 184।।
*यह सारे पाखंड फेल मचावें।। 184।।
 
                      अहंकार।।
तने नहीं पापा चिन्हा रे
तने मनुष्य धरा दिया नाम पशु के काम करें।।
नर कितनी कर चतुराई एक दिन।। 84।।
*सोच ले न कौन है तेरा।। 174।।
गुरु वचन हिए में धार नहीं अकल काम।।
*मैं नित कहूं समझाए छोड़ दे मेरी मेरा रे।। 196।।
नुगरा मत मिलियो चाहे पापी मिलो हजार।। 166।।
 
                   भवसागर।।3।।
रे तूने बेरा कोना बात बिगड़ गई तेरी।। 191।।
मैं कैसे उतरू पार नदिया अगम बहे।। 303।।
लिया दिया सब चुका दिया है।। 247।।
  
                 काम विषय वासना।।4।।
वा घर कभी ना जाना जी। 117।।
तने व्यर्था उम्र खोई है फंस के विषय विकार में।। 215।।
काम ने सब जग खाया रे साधु।। 309।। 196।।
विषयों में फस कर बंदे 179।।
 
                          दुख।।3।।
हरे राम मुख बोल संकट कट जाएगा।। यू43।।
दुख में मत घबराना साथी।। 181।।
दुख आया है बंदे।। 181।।
   
                  आवागमन।।
आवागमन मिटावे सतगुरु।। 101।।

                     विकार।।6।।
मेरे मिट गए सभी विकार।। 33।।
तन मन के मिटें विकार जिसने।। 146।।
यह पांच बली बलवान क्यों बिरच रहे।। 163।।
छुड़वाइयों मेरे साइयां लागे यह ऐब निगोडे।।
भरा छल रग रग में तेरे बंदे।। 172।।     
नींदा चुगली ईर्ष्या में मन को नहीं।। 202।।
 
                  अभिमान + मौत
* गर्भ ना करो रे गवारा, जोबन धन पावना।।177।।
*गंदी खोड़ अंधेरी तेरी रे।। 168।।
*अति कभी ना करना बंदे।। 169।।
*होता क्यों ना गरीब रे।। 169।।
*मुखड़ा क्या देखे दर्पण में।। 170।। 
* अपनी आत्मा पहचान मत कर गुमान।। 172।।
* मैं नित कहूं समझ पाए छोड़ दे मेरा मेरी रे।।
काहे बजाए शंख नगाड़ा काहे करे अजान रे।।2।।
*क्यों चाले टेढ़ा मेढा रे।। 173।।।
*बीत गई सो बात गई रे।। 177।।
*तेरे जैसे बहुत घने मर गए।। 180।।
*मानव किस का अभिमान करें।। 180।।
*करता क्यों इतना गुमान बंदे।। 183।।
*पांच तत्व का बना पुतला क्यों इतना अभिमान।। 182।।
*इंसान जगत में आकर तू  क्यों।। 192।। 190।।
*माटी में मिले माटी पानी में पानी।। 175।।
*    अभी मैं क्यों ना मरी।। 174।।
*आसमान में उड़ने वाले धरती को।। 173।।
*नर कितने खप गए सिर बदनामी।। 174।। 171।।

                          बदी कुब्ध।।8।।
*ले के जग से बुराई मत जाना रे।। 44।।
नर छोड़ दे कुब्ध कमान।। 110।।
मत बोवे बीज विघ्न के रे बंदे 168।।
हो मन मेरे दिए छोड़ कुब्द अभिमान।। 116।।
कुब्ध ने छोड़ दे भाई 170।।
मत बोवे बदि के बीज।। 171।।
नर कपट खटाई त्याग करा कर।। 166।।
अगत में मतना बोवे शूल।। 65।।

                        श्रद्धा विश्वास।।
मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे इंसान बदल के।। 176।।
आज के युग में मानवता इंसान।। 173।।

                         प्यास।।3।।
धोबिया जल बिच मरत पियासा।। 323।।
मैं प्यासा पपैया हूं गुरु जल की बूंद पीला।।323।।
*पानी में मीन प्यासी।। 323।।

                 

                        चोरासी।।3।।
म्हारे सदगुरु दीनदयाल हे सखी काटें बंद 84 के।।262।।
जप तप योग तपस्या साधन।। 241।।
कारीगर मत ना भटके रे।। 307।।

                         भोग भुगतान।।
*लिए काट जिसे बो के आया।। 28।।
*लिए भोग जिसे करके चाल्या।। 28।।

                      संसार।।
*जगत में राम नाम है सार।। 105।।
*कर गुजरान गरीबी में कोई दिन।। 67।।
*चार दिन की जिंदगी है चार दिन का मेला है।। 184।।
*यो कितना बड़ा झमेला या दुनिया।। 86।।
*छोड़ कर संसार जब तू जाएगा ।।85।।
*इस जग से सब ने जाना चाहे तो कोई मुल्कीलाट।। 88।।
*झूठा है संसार सारा कैसा तेरा नाता रे।। 85।।
*झूठा है संसार रैन का सपना है।। 85।।
*मायावी संसार झमेला चार दिनों का मेला।। 86।।
*चला संसार छोड़कर रे।। 87।।
*तू किस लिए जग में आया रे बंदे ला ले हिसाब।।89।।
*यह जग है एक मेला यहां से।।90।।
*देख तेरे संसार की हालत कैसी हो।। 87।।
*यह संसार सराए मुसाफिर।। 88।।
*कोई आवे है कोई जावे यह जगत सराय।। 93।।
*इस जगत सराय में क्यों दिल को लगा बैठे।।89।।
*हो मतलब में फंसा जहान जगत यो।। 92।।
*यह दुनिया नहीं जागीर किसी की।। 92।।

                  यार दोस्त मित्र।।7।।
*मेरे सच्चे मन के मीता।।25।।
*हरी सच्चे मन के मीता।।25।।
*रे दीवाने बंदे कौन है तेरा साथी।।
*हमारा कौई मीत ना बैरी।।91
*नहीं रे कोई धुर का मीता।।307।।
*दुनिया में तेरा कोई ना मित्र प्यारा।।91।।
*बैरी तेरा कोई नहीं है, बैरी तेरे फैल रे।।91।।

                     जीवन।।
*कदे जन्म कदे मरण में फस के।। 188।।
*गुरुवर मेरा ये जीवन अब तो सवार दो।। 90।।
*अपना मानुष जन्म सुधार भूल में।। 212।।
जप ले हरि का नाम वक्त गवाई ना।। 90।।
*तेरी जन्म-जन्म की कट जाए।। 263।।
                     खेल।।7।।
खेल तेरे दो दिन के हैं सारे।। 88।।
खेल समझ के खेलन लगी पागल दुनिया सारी।। 304।।
ताश तुम खेलो रे भाई।। 303।।
ये जग ताशों का खेल।। 302।।
सब खेल है किस्मत के कहां रावण कहां विभीषण।। 301।।
*तेरा जीवन तो जुए का खेल है।। 301।। 204।।
देखा अजब खिलाड़ी साधो।। 245।।

                      मन।।
जाग जा रे मन मत सोवे मेरे यार।।लिखना।।
मन लोभी तू तो लूट गया रे संसार में।।
*मन तेरी चाल समझ ना आई।। 106।।
*बसा हुआ भगवान सबके मन मंदिर में।। 97।।
*हरि हरि भजता नाही रे यह मन भया।। 69।।113।।
*चल मन हरि चटसाल पढ़ाऊं।। 97।।
*मन तूं माने ना।। 105।।
*मन मगन हुआ तब क्या गावे।। 105।।
*रे भूले मन वृक्षों का मत ले।। 99।।
*ऐसी सैन समझ मन मेरा।। 115।।
*मेरी तेरी तेरी मेरी करके खो दी।। 97।।
*आवेगा तेरे काम नाम की, बालद भर ले रे।।97।।
*मेरी तेरी तेरी मेरी करके खो दई।।2।।100।।
*चलो रे मन, यहां नहीं रहना।। 104।।
        चलो रे मन कोई नहीं अपना।। 117।।
*मन का मैल ना जावे।। 117।।
*मन राम सुमर ले, लाले हरी में।। 107।।
*कोई बदलेंगे हरिजन सुर, मनवा।। 104।।
*मन नेकी करले, दो दिन का मेहमान।। 104।।
*रे मन मान जा, तन की बनेगी एक दिन माटी।। 111।।
*रे मन मुसाफिर निकलना पड़ेगा।। 113।।
*रे मन मूर्खा भाई गुरु बिन जागा।। 119।।
*मेरा मन मूर्ख भाई गुरु बिन जागा।।2।।119।।
*मेरे पूरे गुरु ने मोह लिया।।113।।
*देख तेरे ही मन मंदिर में बसा हुआ भगवान।। 115।।
*तोरा मन दर्पण कहलाए।। 116।।
*सफा ना देखा दिल का रे साधु भाई।। 116।।
*के मनवा मान ने कह्यो।। 117।।
*मनवा मान रे कहीं।। 117।।
*वा दिन की कुछ शुद्ध कर मनुवा।। 99।।
*सेवा करले गुरु की भूले मनवा।। 98।।
*मन रे क्यों भूला मेरे भाई।। 117।।
*मन रहना होशियार एक दिन चोर सिपाही।। 118।।
*यह तरने का घाट भूले मनवा।। 118।।
*मन भजन करे जा भुला क्यों।। 119।।
*इस ने मैं कैसे समझाऊं मेरा यो मन।। 119।।
*है कोई मन मूरख समझावे।। 114।।
*तजो रे मन, हरी विमुखन को संग।। 114।।
*बाना बदलो सौ सौ बार, बदलो मन।। 120।।
*बदल जा ओ मनवा, हो जागा बेड़ा पार।। 115।।
*मन करले साहिब से प्रीत।। 115।।
*तेरे मन की चादर मैली है।। 114।।
*मेरा मन बैरागी हुआ री मेरी मां।। 114।।
*हुआ मन गुरु भक्ति में लीन।। 104।।
*मन की तरंग मार लो।। 103।।
*छोड़ मन मेरा रे, बेमुखिया रो संग।। 114।।
*मन खोजले, मिले अविनाशी।। 111।।
*मन परदेसी रे, यहां ना तेरा देश।। 112।।
*रुक जा ओ पापी मन रुक जा।। 112।।
रुक जा रे भाई रुकजा गुरु के शब्द पर रुक जा।। 112।।
*धीरे धीरे मोड़ तूं इस मन को।। 112।।
*मन को लगाए पिया पावे रे साधु।। 104।।
*मन मगन हुआ रे, अब क्या डोले।। 105।।
*मन मगन हुआ रे अब क्या गावे।।
*मन मेरा हो, हो चल परम फकीर।। 105।।
*मनवा बना मदारी रे।। 105।।
*मनवा तू किसका सरदार तेरी रैयत।। 109।।
*वश में कर ले मन शैतान को।। 108।।
बंदे मन अपना समझा ले।। 100।।
*मन को डाटले गुरु वचन पर।। 108।।
*मन ऐसा ब्याह करवा रे।। 99।।
*मेरा तेरा मनवा भाई।।100।।
*मन कहां लगा लिया रे, हरी से क्यों तोड़ी।।100।।
*मेरा मन बानिया जी।। 101।।
*तेरी दुरमति कौन मिटावे।। 102।।
*मानत नहीं मन मेरा रे साधु भाई।। 102।।
*भाई मैं नित कहूं समझाए छोड़ दे।। 97।।
*समझ समझ गुण गाओ रे प्राणी।। 103।।
*रोवेगा लोभी थक जाएंगे और उस तेरे।। 110।।
*मनवा लागे मेरा राम फकीरी में।। 103।।
*मन मार सूरत ने डाटो रे।।103।।
*मन रे अबकी बार संभालो।। 109।।
*मन की जो फेरे माला योगी जन वोहे।। 110।।
*आई रे मनवा आई आज तेरी बारी।। 110।।
*भूले मन समझ के लाद लदनिया।। 111।।
*मन्मुख मान चाहे मत मान।। 321।।
राधास्वामी बोल रे मना क्यों फिरता।। 
*साफ कर दिल के शीशे को।। 102।।
*दिल दे दिया सतगुरु प्यारे नू।। 68।।
*रे दिल गाफिल गफलत मत कर।। 98।
*हृदय विच हरि है साधो।। 65।।

                       १४ घट।।
*तूं ढूंढत किसे फिरे, तेरा घट में सर्जनहार।।265।।
*घट पट में लखो हे दीदार।। 57।।
*निरंजन माला घट में फिरे दिन रात।। 257।।293।।
*क्या ढूंढ रहे वन वन घट घट में।। 265।।
*काहे रे बन खोजन जाई।। 260।।
*घट ही में अविनाशी रे साधु भाई।। 260।।
*जीव जीव में है वही हर दिल जिसका।। 307।।
*नजर से देखले भाई ईश्वर तेरे घट माही।। 267।।
*तेरे घट में झलका जोर बाहर क्या देखें।। 265।।
*है तेरा तुझ मांही देख ले।। 318।।

                       १४  ध्यान।।
तेरी आनंद हो जा काया जा बैठ हरी के।।222।।
ना ध्यान हरी में लाया रे इंसान बावले।।43।।
तूने हरी नाम ना धयाया और ध्याया क्या है बावले।।42।।
*दे ध्यान जरा सोच रहा क्या मन में।। 98।।
*ध्यान का वादा करके सजन।। 98।।
अपने प्यारे सतगुरु जी का ध्यान लगाओ घड़ी घड़ी।।9।।

                       हटड़ी गठरी।।5।।
गठड़ी 3 कित भूला रे मुसाफिर।। 121।।
गठड़ी में लागे तेरे चोर मुसाफिर।। 121।।
*गठरी छोड़ चला बंजारा।। 120।।
हटड़ी छोड़ चला बंजारा।। 121।।
171*के बांध गाठड़ी लाया रे बंदे।। 125।।

                       सौदा।।17।।
* सौदा करे सो जाने रे।। 122।।
*कोई सौदा ले लो खुली है धर्म की हॉट।।122।।
*चल सतगुरु की हॉट सौदा महंगा है।। 122।।
*हम सत्य नाम व्यापारी साधु गुरु नाम व्यापारी।। 124।।
*हम हैं सत्यनाम व्यापारी प्रेम नगर।। 124।।
*हमसे कौन बड़ा व्यापारी।। 316।।
*अजब है यह दुनिया बाजार।। 126।।
*हम से कौन बड़ा परिवारी।।316।।
*साधु भाई सतगुरु है व्यापारी।। 126।।
*सोदा कर चल रहे भाई यहां तुम।। 123।।
ये सौदा करो सतभाय प्रभात रे।। 123।।
*समझ सौदा कर चलो रे तेरा जन्म।। 124।।
*तेरा मेला लगा बाजार सौदा कर चल।। 121।।
*ऐसी ताली रे लगाए चला जा।। 121।।
*ऐसी ताली रे लगाए चला जा।। 121।।
*आया था नफा कमावन टोटा।। 124।।
*भाई तू शियाना को ना गैर लिया।। 123।।
*कोई ऑन करो व्यापार घाटा।। 123।।

                    खेत।।5।।
*चिड़िया चुग गई खेत मुसाफिर।। 
*खेती भली कमाई साधो, अलख नाम लो लाई।। 124।।
*गुरुजी दे दो आशीर्वाद खेती।।124।।
*तेरा चिड़िया ने खा लिया खेत।। 124।।124।। 
*तेरा चिड़िया ने खा लिया खेत।। 122।।
*तेरा चिड़िया ने खा लिया खेत।। 121।।

 +                  बंजारा।।टांडा।।4।।
*बनज कैसे किया रे मेरे लालो के व्यापारी।।82।।
*हे बंजारन तेरा छोड़ चला बंजारा।। 137।।
*बंजारन अखियां खोल टांडा तेरा किधर चला।। 138।।
*टांडा तो तेरा लग जाएगा बंजारी उठ।। 138।।
*टांडा लाद चला बंजारा।। 138।।

                       रोग दवाई।।   15।।
गुरु नाम की दवाई जिसने खाई।। 128।।
*गुरु मेरा वैद्य है जी।। 128।।
*वैद्य अगम का पा गया है।। 126।।
*सारा जग रोगिया रे जिसने सतगुरु।। 127।।
*यह जग रोगिया रे जाने सतगुरु वैद्य।। 127।।
*कोई रोगी ले लो भाई गुरु बाटे वैद्य दवाई।। 129।।
*कोई रोगी रोग कटा लियो।। 129।।
*तेरा जन्म मरण कटे रोग दवाई पीले नाम की।। 129।।
*नब्ज या वैद्य क्या देखे मुझे दिल की बीमारी है।। 130।।
*मेरा सतगुरु वैद्य सियाना मुझे नवाज।। 130।।
*दूर धाम से चलकर या मौज उतर के आई।। 127।।
*यो हे तो मने ले जा गा।। 130।।
*तेरे कोन्या वश का रोग कोई कटेगा।। 127।।
*लेलो रे नाम दवाई एक वैद्य अनामी से आया।। 128।।

                     जड़ी बूटी।।5।।
*नाम की जड़ी रे हरी नाम की जड़ी।।6।।
* थारी काया रहे अलमस्त नाम की।। 200।।
*पी ले न भाई पी ले गुरु नाम की बूटी।। 130।।
* पीले पीले रे मना नाम की जड़ी।। 127।।
बूटी गुरा ने पिलाई मेनू होश 131।।

                           रस।।9।।
रस की भरी एक वानी।।
हरि रस बूटी पीले।।
सतगुरु दीन दयाल राम रस प्याया है।।
*पी ले प्याला हो मतवाला।।246।।
*भजन मे रस ही रस आवे।।
है कोई रसिया महल का।।
जाके पीए से अमर हो जाए।
कोई पीवे रे रस राम नाम का।।
रस गगन गुफा में अजर झरे।।

                        वकील मुकदमा।।3।।
*तू कर ले गुरु ने वकील।। 94।।
*तू कर ले एक वकील मुकदमा भारी है।। 95।।
*मुकदमा हो गया रे तुम कर लो एक वकील।। 94।।
                
                   
                         हिरनी।।3।।
*हिरनी या हरि ने टेरन लागी।।59।।
*रे संकट में साधु हिरनी हरी राम पुकारी।।59।।
*रोवे हिरनी हे मालिक कैसी मुसीबत आई है।।60।।

                    बाण तीर।।6।।
*सतगुरु ने मारा तीर री।।109।।136।।
म्हारे सतगुरु ने मारा बाण।। 110।।
बाण हरी का लग गया हे।। 136।।
मेरे लग गए बाण सुरंगी हो।। 135।।34।।
मेरे सतगुरु दे दिया मौका ऐसा तीर।। 136।।
म्हारे प्रेम विरह के बाण लगेंगे किसी हरीजन के।। 136।।

                 
                       लग्न।।
*मोहे लगन लगी गुरु पावन की।।
*लगन लागी थारे नाम की।।
*लग्न लगाए फकीर तन में लागे।।
*गुरु से लगन कठिन है रे भाई।। 130।।
*दीया तो चासो भाई गुरु की लगन का।। 126।।
*लगन तुमसे लगा बैठे।।132।।
*लगन मारे लागी हो।। 130।।
लागी कहे जग सारा लागी के घर तो दूर है।। 134।।
*लागी का मार्ग और है।। 129।।
*ऐसा ऐसा लगन लिखाया गुरुजी।। 132।।
मैंने लगन लगी उस मालिक की।। 133।।

                     १२ प्रेम।।
*प्रेम बिना ना सतगुरु मिलता।। 120।।
*प्रेम का मार्ग बांका रे।। 135।।
*प्रेम की बात निराली है।। 139।। 136।।
*प्रेम प्रीत की रीत दुहेली।। 136।।
*सजन यह प्रेम की घाटी निभाओ तो।। 135।।
*म्हारे प्रेम संदेशी गुरु आए।।65।।            
लाले प्रीति गुरु से भाई।। 135।।
*तू कर प्रभु से प्रीत, यूं ही दिन बीत जाते हैं।। 136।।
*प्रीत लगाकर प्रीतम पावे।। 137।।
*प्रीत गुरु संग ना जोड़ी मन कहा।। 107।।
*हरि प्रीतम से प्रीत लगा के।।66।।
*सबसे ऊंची प्रेम सगाई।। 134।।

                   १२मुक्ति।
मेरी साहब अविनाशी मुक्ति रहे थारी दासी।।
*जिंदा राम कहो या सतगुरु।। 133।।
*करो ओम नाम का सुमिरन मुक्ति मिल जावे।।1।।
*बिन सतगुरु के भजन बिना तेरी मुक्ति।। 133।।
*गुरु के बिना बंदे तेरी कैसे होगी मुक्ति।। 134।।

                       १२पंथ।।
*पंथीड़ा पंथ बांका रे।। 137।।
हमारा पंथ है बांका, कहूं निज नाम की शाखा।। 137।।

                      १२  भक्ति।।
*भक्ती के घर दूर बावले।। 134।।
*       भक्ति कर सतगुरु की वंदे सफल।। 132।।
*भक्ति दान गुरु दीजिए।। 134।।
*या माया उपजे बेशुमार भक्ति का बाग।। 133।।
*भक्ति का मार्ग झीना रे।। 134।।
*भक्तवत्सल भक्तन सुखदाई।। 137।।
*तेरी याद सतावे मने पल पल रुलावे।। 253।।

                     शब्द।।
*शब्द तलवार हैं भाई साधु।।62।।
*कोई चूड़ी ले लो आया शब्द मनिहार।। 60।।
*शब्द बनी तलवार गुरु के सत्संग में।। 62।।
*तू पकड़ शब्द की डोर सखी।। 61।।
शब्द तेरा दर्द अनूठा रें।। 61।।
*एजी एजी साधु सार शब्द हम पाया।। 243।।
*शब्द रे तेरी विरले ने परख करी।।61।।
*शब्द तेरी सार कोई कोई जाने।।64।।
*शब्द हमारा सत्य है नहीं शब्द से।। 295।।
*साधु शब्द साधना कीजिए।। 279
*एजी एजी साधु सार शब्द हम पाया।।243।।
*तू समझ देख ले सतगुरु शब्द आधार।।65।।
*जिसके लगे शब्द की चोट।।61।।
*जिसके लगे शब्द की शेल वह घायल।।63।।
*शब्द मत छोड़ो रे शब्द के।।61।।
*जो गुरु शब्द पर डट गए।।63।।
*जो शीश्य धर्म पर डट गए मिट गए।।62।।
*आजा न शब्द की गैल दिखाऊ तने।।63।।
*ढूंढ शब्द में कनियारी।।215।।
*मने सुनी शब्द की लहरी।। 315।।

                        सूरत
*ना सोवे सूरत सुहागिन।। 141।।
*सुरता होले शब्द की गेल।। 145।।
       सूरता हो ले ने चलने को त्यार शब्द खड़ा।। 139।।
*गुरु मिले खिलावन हार।। 146।।
*गुरु मिले पढ़ावन हार।। 145।। 139।।
*उठो उठो हे सूरत मेरी जागो।। 150।।
हेरि मेरे पांच लगे लगवाल।। 163।।
*बिचाल बैठ लेना है सोहता लगना परले पार।। 144।।
         सतगुरु खोजो री प्यारी।। 153।।
         सुरतीया झोेके ले गुरुजी थारे अंगना में।। 143।।
तू तो सै मैली सी नार।। 151।।
*चलो पिया के देश है मेरी सूरत सहेली।। 138।।
*रट ले न नाम सुरता शब्द सार का।। 152।।
*सूरत सुहागिन हे बड़भागिन।। 150।।
*तेरा गुरु से मिलन कैसे हो सत्संग में।।141।।
*तेरा हरी से मिलन कैसे होय गली तो चारों।।142।।
*तेरा गुरु से मिलन कैसे होगा हे।। 142।।
*धर ले सुरता ध्यान हे अटल अटारी में।। 151।।
*कहे तो ले चालू हे।। 154।।
*सूरत सुहागन सुन मेरी प्यारी अगम।। 154।।
*सुरत तू कौन कहां से आई।।142।।
*सूरत तूं मन से यारी तोड़।। 151।।
*सूरत हिलकी देदे रोवेगी।। 152।।
*भूल भरम का सुरता तेरे भरोसा से।। 140।।
*मेरी सूरत गगन में जाए रही।।140।।
*सूरत निज नाम से अटकी है जी।। 152।।
*सूरत बंजारन प्यारी है।। 152।।
*जाग री 3 मेरी सूरत सुहागन।। 142।।
*मेरी प्यारी सुरतीया हे देश गुरु के जाइए।। 142।।
*गुरु की शरण में आओ जी सुरतिया।। 143।।
सुरता प्यारी तू देश दीवाने।। 143।।
*हे सुरता तुम करो हरि का धान।। 143।।
*हे सुरता चल देख दीवाना देश।।145।।
*हे क्यों ना सतगुरु ने रटती।। 155।।
*सुरता भूल भरम दे त्याग।। 157।।
*तेरे बंधन कट जा सारे।। 157।।
*सुरतिया झूल रही।। 157।
265*हे तो होले सुहागन सुरता त्यार।। 158।।
*मेरी प्यारी सुरतिया है।। 158।।
*सूरत सुहागिन नार हे।। 158।।
*सूरत सुहागन नार हे उठ जाग भजन में।। 161।।
*होले सुरता त्यार।। 159।।
*मेरी सूरत भजन में लगी।। 159।।
*सुरत सुहागिन गुण भरी।। 159।।
सूरत सुहागन नार हे साजन घर आई।। 159।।
*सूरता प्यारी चाल जड़े।। 161।।
*सुरता तेरा तेरे बिना।। 161।।
*मेरी सुरता प्यारी शब्द डोर।। 161।।
*मेरी सुरत बावली हे।। 158।।
*मेरी सूरत सुहागन चाल जड़े।। 154
*सजन घर कैसे जाऊं हे।। 162।।
*सत्संग में सुरता चाल अपनी नब्ज।। 145।।
*धाम दिनोद में चलिए सुरता अपनी नब्ज।। 146।।
*सत्संग के में चलिए सूरता नब्ज दिखा लिए।। 148।।
*सूरत अपने घर चलो हे तेरी शब्द सवारी।। 148।।
*हे सुरता क्यों गई राम ने भूल।। 148।।
*हे सुरता ले चमक चुनरी ओढ़।। 148।।
*हे सुरता यो जग का झूठा खेल।। 149।।
*हे सुरता तेरे सतगुरु देवे बोल।। 149।।
*हे सुरता आओ हे सत्संग में हो सै देर।। 150।।
*हे सुरता चाल बसों उस देश सवारी आ गई।। 150।।
*सुन सूरत सयानी है रंगी हर।। 145।।
*हे मेरी सूरत सुहागन नार नींद में सोए।। 144।।
*हे तू सतगुरु साबुन लाय तेरी सूरत।। 153।।
*चेतन हो के जड़ने पूजे 156।।
सुन ले सुरता प्यारी।। 155।।
*सुन मारी सुरता गुरु के वचन अनमोल।। 145।।
*उठ सवेरा जाग हे।। 153।।
*तू तो चाल सजन के देश।। 153।।
*सुरता प्यारी तुम संदेश दीवाना देश।। 143।।
*सुरता होले न भजन वाली लार।। 140।।
*सूरत मेरी साहिब से राजी।। 159।।
*हे सुरता दिए नींद नशे ने त्याग महल में।। 141।।
300*पहरों पहरों हे सुहागिन सूरया ज्ञान गजरा।। 140।।
*सूरता पी ले न शब्द की शाही शराब।। 140।।
*हेरि मेरे पांच लगे लगवाल।। 162।।
*हे री मेरै हरी मिलन की लगन साजन सखी।। 162।।      
*हे री मेरे हरी मिलन की लगन।। 161।।          
                            चुनरी।।
*धो ले ने काया चुनरी।। 165।।
*आया नगरी में धोबिया सुजान।। 165।।
*सत्य के धनी हो मेरी रंग दे चुनरिया।। 165।।
*तने तो मेरा पिया मोह लिया है।। 165।।
*तूने तो मेरा पिया मोह लिया है।। 166।।
*मेरे सतगुरु है रंगरेज।। 165।।
*जतन से जरा औढ चुनरी।। 166
*मेरी चुनरी के लगा दाग पिया।। 164।।
*मने लागे या चुनरी प्यारी।। 164।।
*चुनरिया ओढ़न वाली है।। 164।।
*पीहर में दाग लगा आई चुनरी।। 164।।
तू तो धो ले न साबुन मार।। 168।।
गोदी में फूल हजारा प्रीतम प्यारा।।
*दिन दिन मेंली होय चुनरिया।।167।।
*दिन दिन मैली होय चुनरिया।167।।

                        चादर।।
*या चादर हुई पुरानी रे।। 169।।
*म्हारे गुरुवा राम रस भीनी।। 169।।
*म्हारी आओ बहन सत्संग में।। 169।।
*पांच तत्वों की बनि या चादर।। 170।।
*मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊं।। 167।।

                १७८  वैराग्य।।
छोड़ मत जाइयो जी महाराज।। 167।।

             १७८      सुहागिन।।
*सुहागिन में तो होय गई मेरा जिस दिन।। 171।।
*हुई मेहर गुरुओं की मरने लगा परिवार, 171।।
                   
                           समय।।
सब दिन बंदे रहते ना एक समान।।
यह बीता समय अनमोल फेर नहीं आएगा।। 194।।

                          काल।।17।।
278।   राम नाम से तूने बंदे क्यों अपना मुख मोड़ा।।
*277    मैं काले ने खा ली री, के कर ले वैद्य विचार।।
*274   गाफिल कैसे रे तेरे सिर पर गरजे बैरी।। 111।।
भज ले हरी को 1 दिन तो है जाना।। 21।।
*275     सब लिए कॉल ने डंस रे।। 189।।
*274     साधु कॉल ने जाल फैलाया।। 230।।
*274।   साधु काल ने जाल फैलाया।।
277    तू तो फसी काल के जाल।। 195।।
*275     छम छम करता आवेगा जब समय कल का घोड़ा।। 180।।
*276     गुरु नाम को रट ले दौड़ा जाए रे समय का घोड़ा।। 323।।
276     नाम हरि का जप ले दौड़ा जाए समय का।। 180।।
276    मत रोके काल हरामि मैंने देश।। 175।।
*278   पछतावेगा रे बंदे कॉल सिरहाने जब आवेगा।। 1
*278     सोच समझ के चाल रे कॉल तुझे खाएगा।। 178
*305    सामान सौ बरस का पल का नहीं ठिकाना।। 177।
*298     सामान सौ बरस का तूने जमा किया है।। 176।।
305     कर ले न सामान मुसाफिर।। 189।।
*298   तमाशा थोड़े से दिन का रच दिया।। 183।।
*298।  नाशवान की आस में दिए
*299।    लाखों सिर द रखे अब तक
।।सांसो का क्या भरोसा।। 185।।
*307    मैं तो मारी हो गई राम धंधा करती।।
*308     मैं तो हार गई मेरे राम।।
*308     सारी उम्र गई धंधे में।।
*307।    सासु दी ताना मारे सोना नंदन।।

                           यमराज।।
*292    मैंने अब के बचाले मेरी मां।। 51।।
*293    तूने धरमराज के जाना।। 174।।
*297।   भजन गढ़ बांध ले रे तेरा ।।
*297।    जिसमें वचन सुने साहब के द्वारा।।
*296      हरी के घर से आवे बुलावा।। 175।।
*296।   रे दिल गाफिल गफलत मत कर।।
*295    नर तू बचना चाहे यम से।। 214।।
*295    जाना पड़े जरूर बंदे तु राही जमपुर का।। 196।।
*294     संदेशा आ गया यम का चलने की।। 187।।
*294   कदे जन्म में कद मरण में फंस के।। 186।।
* 295    यमसे बचना चाहवे कर सतगुरु से प्यार।। 176।।
*292   चलो चलो सखी अब जाना।। 181।।
*292     भोली बुड़िया के आए लनिहार।। 179।।
*293    भोली बुढ़िया हे, तूं रटे क्यों ना जिंदा राम ने।। 20।
*291    बुढ़ापा तेरी कोई ना बुझेगा बात।। 179।।
*290।   नर चेत रे बुढ़ापा आवेगा सदा ना रहे।।
*291    सखी री मैं दे दूं झुकते तोल बुढ़ापा।। 181।।

                             मौत।।
*302।   आशाओं का हुआ खात्मा।।
एक दिन पड़ेगा सबको ही जाना।।216।।
एक पलका नहीं भरोसा तेरा पगले इंसान।।181।।
*303    एक दिन जलेगी तेरी काया आग में।।184।।
*303     एक दिन गोगड़ आसी रे।।183।।
*303।   छोड़ चलेगा जग से नाता सदा सदा।।
*304    एक दिन तो चलन होगा।।
*304    एक दिन जाना पड़े जरूर।।182,
*304    सब खड़े देखते रह जाएंगे।।187।।
काहे वेर करें तूं इंसान।। 172।।
*304   नर धोखे धोखे लुट गए आगई।। 193।।
सब खड़े देखते रह जाएंगे।। 194।।
छड़ जावा दुनिया रंगीला बाग।। 193।।
*303    चार दिनों की चमक चांदनी।। 213।।
*304    एक बार जीवत मर ले रे।। 197।।
*304     दम निकले पीछे घड़ी ना राखे कोई।। 178।।
कुछ सोच समझ प्राणी 1 दिन दुनिया से है जाना।। 177।।
*304    भाई अंत समय में काम ना आवे।। 183।।
*304    हमको उड़ावे चदरिया चलती बरियां।। 194।।
*304   बंदे चलेगा तेरा कोई ना बहाना।। 194।।
*304     बाजा अंत समय का बाजा साझा।।198।।

                           उमर।।16।।
*265।   तू बजने सतनाम उम्र रही थोड़ी।।
*264    मेरी मेरी करते करते बीती रे उमरिया।।191।।
263  सब उम्र बीत गई धोखे में परिणाम ना जाने।। 190।।
*265   कदे लिया ना हरि का नाम।। 190।।
*260    तेरी गई उमरिया बीत।। 189।।
*260    चली चली रे उमर बीत चली रे।। 189।।
*260चली जा रही है उमर धीरे धीरे।। 190।।
*262    तेरी बीती उमरिया जाएगी रे।। 185।।
*कदे गई ना गुरु के डेरे में।। 54।।
*263    राम सुमर राम उम्र बीत जाएगी।। 41।।
*263    राम तू रट ले रे प्राणी।। 40।।
*261    उमरिया बीती जाए तूने राम नाम।। 190।। 
*261    उमरिया बीती जाए रे जीवन जल।। 190।।
*262   उमरिया बिताए दई राम नहीं जाना।।192।।
*262     बंदे बीती उमरिया या छूटेगी नगरिया।। 192।।
*262    करो हरी का भजन प्यारे उमरिया बीती जाती है।। 
*263।   तेरी बीती जाए उमरिया हरि के नाम बिना।।

                       माली बगीचा फूल।।2।।
*258    क्या कर लेगा माली जब टूटेगा।। 191।।
*258    उजड़ा लखीना तेरा बाग रे।। 178।।

                      मानव जीवन।।
*यह जिंदगी एक किराए का घर है।। 241।।
*ये मनुष्य जन्म हर-बार ना मिल।। 195।।
*327सीखा करो भाई गम खाने की बात।। 317।।
*327     जी करके भतेरा देख लिया मरने की करो।। 255।
*327    करना हो सो कर ले साधु।। 205।।
*329    गुरुवर मेरा ये जीवन अब तो।।

                       जीवन।।
सतगुरु के दरबार में आकर बंदे तू मौज उड़ा लिए।।190।।
*325  बार-बार नहीं आवे रे जन्म तेरा।।195।।
*325।   अपना मानुष जन्म सुधार।।
*325   कदे जन्म कभी मरण में फस के।।
*326   यह मनुष्य जन्म हर बार ना मि
*छोटा सा बनके हांड रे गलिया।। 186।।
*छोटा सा बनके रहना रे जगत में।। 186।।
*329    जीवन ये अनमोल रे तूने यूं ही।। 199।।
*329   जीवन है अनमोल रे इसी मिट्टी में ना रोल रे।।199।
*330    जीवन है अनमोल इसके दाग।। 198।।
*330    अनमोल तेरा जीवन।। 198।।
*331    ये दो दिन का जीवन तेरा।। 178।।
*दो दिन का जग में मेला सब चला चली।। 182।।
*332    दो दिन की जिंदगानी रे प्राणी।। 182।।
*334    यह जिंदगी धोखा दे जाएगी।। 196।।
*334    जिंदगी की बाजी प्यारे।। 201।।
*334   यह जिंदगी एक किराए का।।
*332    जिंदगानी भूल में लुट गई।। 190।।
*332    नहीं भरोसा कुछ भी बंदे।। 218।।
550*331     हरि नाम सुमर सुखधाम जगत में।। 21।।

                   शरीर तन काया।।
*देही ने क्या धोवे मलमल के।। 168।।
*जिसमें बोले सै रमता रे राम।। 48।।
*हम बसे चाम के धाम।। 48।।
*तन धर सुखिया कोई ना देखा।। 187।।
            तन के अंदर देख तुम्हारे।। 38।।
*हुई रंग महल में चोरी।। 76।।
*ले ले न मुजरा मेरा हो गुरुजी।। 50।।
*रहना ना अमर शरीर।। 189।।
*करे काया का गुमान काया जल जाएगी।। 203।।
*तन खोजा मन पाया रे साधु।। 204।। 111।।
*या नर देही बंदे फिर ना मिलेगी।। 203।।
*डोर लाग रे गुरु संग डोर लागी रे।। 203।।
*तेरा सूना मनुष्य शरीर प्यारे गुरु बिना।। 205।।
**तेरा सुना मनुष्य शरीर।। 205।।
*मारे अवगुण भरे हैं शरीर।। 202।।
*म्हारे अवगुण बने हैं शरीर।। 201।।
*मारे अवगुण भरे हैं शरीर।। 201।।
*तन मंदिर अंदर खेले है खेल।। 205।।
*काया रे तेरी पावनी रे बंदे।। 202।।299।।
*या काया कुटि निराली जमाने भर से।। 205।।
*इस माटी के स्थूल का सत गुरु बिन कौन।। 204।।
*तेरी काया के अंदर छोटा सा है मंदिर।। 204।।
*तेरी काया नगर का कौन धनी।। 200।।
*तेरी काया नगर का हीरा।। 200।।
*ओ कायागढ़ के वासी इस काया को।। 203।।
*काया नगर गढ़ भारी।। 203।।
*जप ले हरि का नाम काया ना तोहे ।। 205।।
*रे मन मुसाफिर निकलना पड़ेगा काया।। 203।।
*मत प्रेम करो इस काया से।। 200।।
नर तेरी काया है अनमोल।। 201।।
*तेरी काया मैं गुलजार।। 201।।
*कहां से आया कहां जाएगा खोज करो।। 202।।
*थारी काया कमडती नाड़ी।। 200।।
*ये तन बालू कैसा डेरा।। 199।।
*लाई रे तन मन धन बाजी।। 199।।
*देही ने के धोवे मलमल के।। 197।।
*माटी के पुतले तूने काहे को चिंता लगाई।। 198।।
नर चेत रे बुढ़ापा आवेगा।। 179।।

                     भूल भरम
*भटकता क्यों फिरे वन वन अरे नादान परदेसी।।90।।
*सब जग भूल भरम में जाए।।90।।
*दीवानी दूनिया रे भुला है जग सारा।।319।।

                       संसार।।भरम।।43
*क्यों जग को देख लुभाया।।92।।
*हे जी हेजी साधु कैसा ये विश्व बनाया।
*ये नासी शक्ल जमाना है कहो वस्तु कौन अमर है।।178।।
*जगत में स्वार्थ का व्यवहार।।
*जगत में राम नाम है सार।।105।।
*जगत में आकर बहुत गए झक मार।।90।।
*झूठा सब जगत पसारा।।92।।
*मतलब में फंसा जहान जगत यो।।92।।
*जगत में कोई नहीं तेरा रे।।93।।
*मुट्ठी भींच कर आया जगत में।।85।।
*तज आश जगत की भज ले ने निज नाम।।88।।
*रे जोगिया यह जग है एक सराय।। 93।।
*पानी बीच बताशा संतो जग का यही तमाशा।।259।।
*जग 2 दिन का है मेला।।97।।
*क्या लेकर तू आया जग में।88।।
*देखो सब जग जात बहा।।101।।
*ऐसी भूल दुनिया के अंदर।। 35।।
*या दुनिया भरम ने खाई रे।। 85।।
*तूने जाना होगा रे सारी दुनिया ने छोड़ के।।195।।
*दुनिया से हम हारे तो आए तेरे द्वार।।90।।
*दुनिया में हो बाबा नहीं है गुजारा किसी ढब से।।113।।
*बंदे कब ध्यान लगावेगा।। 85।।
*या दुनिया ऊत कसूत।।87।।
*घूम घूम के देखा सारे।।95।।
*यह दुनिया नहीं जागीर किसी की।।89।।
*मुझे मिल गया मन का मीत दुनिया क्या जाने।।59।।
*मेरा सुनले वचन हितकारी।। 40।।
*मैं सत्संग के में जाँगी, ढंग देख लिया संसार का।। 91।।
*त्याग के चलना होगा सतगुरु के दरबार में।। 86।।
*मतलब का संसार पगले मतलब का।। 49।।
*मतलब का संसार होश कर चालिए।। 47।।
*यह संसार सराए मुसाफिर।।88।।
*देख लिया संसार हमने देख लिया।।89।।
*यो संसार पाप का बंधन।।96।।
*मालिक मेरा राज्य है चाहे रुठो।।92।।
*हरि से नेह लगा ले बाबू।। 81।।
*भाई तेरा कोई ना अपना है।। 92।।
*कोई समझे ना गुरु की बात को।। 113।।
*सोचो जरा तुम करो विचार।। 102।।
*पैदा सो नापैद जगत में मर मर के इंसान गए।। 321।।
*जगत तज चलना है रे नादान।। 185।।
*तोड़ चलेगा जग से नाता सदा सदा।। 191।।
*छोड़ इस दुनिया को बंदे एक दिन जाना है।। 193।।
                      नींद सोना।।37।।
*चौरासी की नींद से  सतगुरु ने।। 216।। 210।।
*सब दिन धंधे मैं खोया सोया रात में पड़ के।।209।।
*ईब तलक ना चेत किया।। 209।।
निंद्रा बेच दूं कोई ले तो।। 209।।
*के सोवे सुख नींद में।। 209।।
*देख प्यारे मैं समझाऊं।। 38।।
*जागो जागो रे मुसाफिर उठकर करो।। 207।।
*संतों जागत नींद ना कीजे।। 207।।
*उठ जाग मुसाफिर भोर भई।। 211।।
बंदे जाग भजन में लाग, तेरी थोड़ी उम्र।। 211।।
*क्यों सोवे तूं जाग दीवाना।। 210।।
*भतेरा सो लिया रे अब तो।। 207।।
*दीवाने जाग जा रे ये है ठगों की नगरिया।। 213।।
*कैसे सोया रे मुसाफिर आवे नींद घनी।। 213।।
*क्या सोवे सुमरन की भुजिया बरिया।। 213।।
*जाग रे नर जाग दीवाना।। 215।।
*जाग प्यारी अब क्या सोवे।। 212।।
*जाग जाग नर जाग सवेरा।। 216।। 211।।
*जाग रे मुसाफिर ज्यादा सोना ठीक नहीं।। 218।।
*मुसाफिर जागते रहना।। 215।।
*कौन वक्त सोवन की बारी।। 216।।
*जाग जा मुसाफिर घना सोवे मत ना।। 212।।
जागो जागो वक्त है जागो।। 215।।
*सोवन वाले उठ जाग रे तेरी  गांठ।।
*उठ जाग सवेरा हो गया।। 211।।
*सब सोवें नगरिया के लोग।। 210।।
*हे मैं नींद भरम की सोऊं हे।। 210।।
*आशिक होना फिर सोना क्या रे।। 211।।
*मुसाफिर सोवे क्यों पांव पसार।। 211।।
*जाग जा मुसाफिर प्यारे।। 207।।
गाढी नींद ना सोवे।। 208।।
*निंदिया तोहे बेच आऊं।। 209।।
*तू दे निंद्रा ने त्याग।। 212।।
*वा घर जाइए हे निद्रा।। 209।।
*कीचड़ में क्यों सोया रे।206।।
230*क्यों सोवे नींद भरम की।। 208।।
*साईं के नाम बिना नहीं निस्तारा जाग-जग।। 208।।

                        १६८चरखा।।12
*चरखले वाली री तेरा चरखा बोले।। 218।।
*चरखा चले सूरत विरिहन का।। 217।।
*चरखा परे हटा ले री मां।। 218।।
चरखे का भेद न पाया कारीगर ने अजब बनाया।।
*चरखे का भेद बता दे सुन कातन वाली नार।। 220।।
*चरखा परे हटा माई।। 219।।
*पांचों तत्व मिलाके चरखा अजब।। 219।।
चरखा रे सतगुरु ने खूब घड़ा मेरे भाई।। 219।।
*चरखा नहीं निगोड़ा चलता।। 220।।
*चरखा हालन लागया सारा।। 216।।
*हमैं कोई कातन दे सिखाए।। 217।।
बहना व्यर्था जन्म गवाया चरखे।का 217।।

                     १६७से  बंगला।।4
*बंगला भला बना दरवेश।। 221।।
*बंगला अजब बनाया खूब।। 221।।
*यो बंगला बना गगन के बीच।। 222।।
*बंगला अजब दिया करतार।। 222।।

                   १६६से    पिंजरा।।22
*बोल सुआ राम राम मिठी।।43।।
*मन तोते तेरी बंद छूट गई।। 223।।
*दे हरी वचनों में  ध्यान।। 225।।
*मुनिया पिंजरे वाली ना।। 228।।
*एक दिन पिंजरा खाली कर जाएगा।। 226।।
*पिंजरे की मैना बोल तुझे।। 228।।
*हम पंची परदेसी मुसाफिर।। 228।।
*ओ भोले पंछी सोच जरा तेरा असली।। 229।।
*पंछी बिन पिंजरा आवे भला किस काम।। 226।।
*पंछीड़ा लाल आशी।। 206।।
*जिंदगी एक पंछी तो है।। 225।।
*जो मैं होता सोन चिरैया।। 229।।
*ना पल का भरोसा किसी बात का।। 226।।
*भाई पिंजरे के पंछी रे पिंजरा तज के।। 227।।
*पिंजरे के पंछी रे तेरा दर्द ना जाने कोई।। 227।।
*काया का पिंजरा डोले रे।। 227।।
*हो गया पिंजरा पुराना।। 226।।
*पिंजरा तोड़ चला जागा।। 224।।
*तू तो उड़ता पंछी यार।। 224।।
*मायाजाल ने मोह लिया रे पिंजरे वाला।। 224।।
*सोहम सोहम सदा बोल रे तोता।। 225।।
*नारायण नारायण बोल तोते।। 224।।
*भज ले हरि का नाम तोते।। 223।।

                         नाव।।15
पड़ी है आज अब मेरी, भव धार में नैया।।
*भगवान मेरी नैया उस पार लगा देना।।
*मैं कैसे उतरे पार नदिया आगम 
*वे नर हुए नदी के पार।। 19।।
*मैं कैसे उतरे पार नदिया अगम बहे।।303।।
*सुमर सुमर नर उतरो पार।।17।।
*गहरी नदिया नाव पुरानी कैसे उतरे पार।। 55।।
*नाव तेरी मझधार किनारे क्यों कर लावेगा।। 172।।
*मल्लाह के मेरी नाव किनारे लाओ रे।। 191।।
*कबीर मेरी नैया उस पार लगा देना।। 240।।
*भरोसे थारे चाले जी सतगुरु मारी नाव।। 236।।
*गुरुजी तार दो तार दो मेरी फसी भंवर में नैया।। 11।।
*रबारी वीरा रे थाकी टोरड़ी ने धीमे धीमे हाँको।। 315।।
*जरा गाड़ी हल्की हांको मेरे राम गाड़ी वाले।। 23।।
*भजन करले बीती जाए घड़ी तेरी नैया।। 21।।

                           जहाज।।3
*ले ले टिकट नाम की भाई यो जहाज।। 235।।
*सुन्न शिखर में जहार पिया का।। 236।।
हे जी अगम लोक से सतगुरु आकर।। 231।।

                          रेल।13
*रेल धर्म की चलती कोई बैठो आकर।। 238।।
          रेल धर्म की चलती हो कोई बैठन वाला।। 238।।
*उठ जाग मुसाफिर बोले रेल छुट गई।। 233।।
       इस काया गढ़ की रेल में।। 232।।
*जीवन तो भैया एक रेल है।। 234।।
*चली जा रही है जीवन की रेल।। 234।।
चेतन हो जा रे मुसाफिर गाड़ी आने वाली है।। 231।।
छुक छुक जीवन की रेल चली।। 232।।
*छुक छुक रेल चली है जीवन की।। 234।।
*बंदे चढ़ले नाम की गाड़ी।। 237।।
हो जाओ तैयार गाड़ी स्टेशन पर।। 232।।
रेल चलाई ना चले।। 239।।
*या प्रेम की गाड़ी आई गई।। 235।।

                             ३घर।।17
*556  समझ घर आजा रे क्यों करता वाद विवाद।।245।।
*चलो मुसाफिर अपने घर अब तो पूरा हुआ सफर।।241।।
अमर घर पारखी संत निवासा।।145।।
*अगम घर चलना है कर।। 247।।
*उस घर की हमने खोल बता दो।। 248।।
*भक्ति के घर दूर बावले जीते जी।। 243।।
*क्या गावे है घर दूर दीवाने।। 243।।
*वाह घर की शुद्ध कोई ना बतावे।। 290।।
*भुला लोग कहे घर मेरा।। 243।।
*वह घर सबसे न्यारा रे साधु भाई।। 244।।
*छैल चतुर रंग रसिया पर घर प्रीत ना कीजे।। 244।।
*से कितने दिन का डेरा तेरा माटी के।। 244।।
*भाई यूं ना तेरा मकान तेरा तो कहीं।। 245।।
*तेरे अगले घर में रोज खड़क रहे तार।। 245।।
*बोल कहां घर तेरा पगले।। 246।।
*बहुत दूर वह घर है साधु।। 246।।
*गुरु बिन पावे ना वह तो घर और है।। 247।।

                  २   महल।।   घर।।
*कर महलों की सेल महल।। 116।।

                        ३गगन।।11
*साधु भाई गगन घटा झुक आया।।276।।
*गगन में रे अलख पुरुष अविनाशी।। 115।।257।।
*गगन में आग लगी बड़ी भारी।। 251।।
                गगन की कोई साधु जन सैल करें।। 109
*गगन मंडल में जाकर सुनो अनहद वाणी।। 251।।
*गगन गुफा के बीच में बजे ज्ञान के ढोल।। 251।।
*गगन मंडल में अमीरस बरसे।। 252।।
*गगन मंडल लगा ताला।। 252।।
*गगन की ओट निशाना है।। 250।।
*तू चढ जा गगन के बीच।। 250।।
*गगन चढ के देख ले पिया प्यारा।। 251।।
                            अवधूत।।12
*अवधू गगन घटा गहरानी।। 253।।
*अवधू गगन मंडल घर कीजे।। 253।।
*अवधूत कुदरत की गति न्यारी।।252।।
*अवधूत ऐसा ज्ञान विचारी।।253।।
*देखा देखी खेल है अवधि।।254।।
*अवधू अमल करे सो जाने।। 253।।
*अवधु साधक गति विचार।।२५३
*अवधू भूले को घर लावे।। 254।।
*अवधू माया तजी ना जाए।। 254।।
*अवधू मेरा मन मतवारा।। 255।।
*अवधू ऐसा देश हमारा।। 255।।
*अवधू ऐसा देश हमार।। 255।।

                 ३ कबीर ज्ञान गुदड़ी।।31
*गैबी लहर रजा की वाणी।। 246।।
*सत्य के शब्द से धरण आकाश है।। 246।।
बीजों खेत निराला रे अबधू।। 255।।
*कर्ता कर्म से न्यारा रे साधु।। 289।।
*गुणी सांच बता दे जीव कहां से आया।। 290।।
*आवगत से चल आया रे तेरा।। 259।।
*जिया मत मार चेला मुआ मत लाना।। 312।।
*देख कबीरा रोया संसार के लिए।। 317।।
*गुरु रामानंद जी समझ गहो मोरी बहिया।। 311।।
*जपो रे मन केवल नाम कबीर।। 311।।
*मेरा नाम कबीरा रे साधु।। 310।।
*आया है आया है बंजारा केशव।। 310।।
*आज मोहे दर्शन दियो जी कबीर।। 311।।
*साहेब कबीर आजा आत्मा तोहे।। 314।।
*धरती धन्य जहां पर जन्मे साधु संत।। 309।।
*सतगुरु कबीर की वाणी सतनाम की कहे।। 317।।
*काशी जी के वासी रे सतगुरु।। 318
*साधु कीड़ी ने हाथी जाया।। 310।।
*मैं पारस चेतन आप हूं मेरा भेद।। 312।।
*भाग रे भाग फकीर के बालका।। 316।।
*रोवे नीर भरण वाली जब धसा घड़े में कुआ।। 318।।
*तू तो कोई अजब है तेरा अजब तमाशा।। 308।।
*अचरज खेल अचंभा देखा।। 313।।
*अचरज देखा भारी रे साधो।। 313।।
*एक अचंभो देख्यो मेरी मां वन में चराए लाइ।। 321।।
*इनमें कौन राम कहाया।। 313।।
कारीगर की चातुरी कैसा खेल।।308।।
*एक राम दशरथ का बेटा दूजा सकल पसारा है।। 313।।
*मैं क्या जानू राम तेरा गोरख धंधा।। 318।।
तेरे सब दिन बंदे रहते ना एक समान।। 289।।
*कौन कहां से आया रे साधु।। 319।।

                        कबीर   कारीगर।।
तेरा कारीगर बलवान है जिसने यो।। 308।।

                           ६बादल।।3
*बादल झु क आया मेरा भीजा मरहमी चीर।। 311।।
*श्याम में बादल देख डरी।। 311।।
*बादल झुक आया म्हारी भीज रही।। 311।।

                        २ शहर।।
*लूटा लूटा हे शहर भटियारीडुगडुगी शहर में बाजी।। 313।।

                 कबीर      निर्गुण।।
*यह निर्गुण की चर्चा है मूर्ख समझें।। 321।।

                       २  नगरी।।3
मैं तो ढूंढत डोलूँ हे सतगुरु।।33
मैं देखूं थारी नगरी अजब योगीराज।।275।।
*खोज करो नगरी में साधु एक रमता जोगी।। 284।।
                        २ देश।।13
*देखा देश अनोखा गुरु का देखा देश।।
*देखा देश अपारी साधु।।
*               २ऐसा देश हमार।। 254
        कोई दूर बतावे देशां मैंने समझ आप में।। 254।।
*हरि के बिना रे साधु सुना पड़ा यो देश।। 257।।
*रहना नहीं देस बिराना है।। 258।।
*मैं जाऊंगा गुरुओं के देश।। 259।।
*मैं चली पिया के देश लगन।। 256।।
*मैं तो जाऊंगी पिया के देश पीहर में।। 256।।
*नर सोच समझ कर चलिए मन मूरख देश पराया।। 255।।
*तू राम भजन में लग जा तने देश गुरु के।। 261।।
*भूल गई रस्ता में  तो भूली रे ठिकाना।। 274।।
*मरहम होए सो जाने भाई साधो ऐसा है देश।। 284।।

                          ५अनहद।।
*अनहद की धुन प्यारी रे साधु।। 316।।

                        ५अवगति।।
*अवगत की गति न्यारी रे साधु।। 253।।     
                       ३०फकीर फकीरी।।16
*जो आनंद संत फकीर के।। 272।।
*मन लाले राम फकीरी में।। 272।।
*फकीरी में मजा जिसको।। 269।।
*दर्श दीवाना बावला और मस्त फकीरा।। 267।।
*बंदी छोड़ छुड़ा ले मेरे मन को।। 269।।
*फकीरी सदा अखंड निजी मूल।। 269।।
*फकीरा कैसी सस्ती फकीरी पाई।। 269।।
*संदेशा संत फकीरों का।। 271।।
*रमते से राम फकीर।। 270।।
*फकीरा बिन धूनी तपता।। 320।।
*हाल फकीरी घट के अंदर।। 269।।
*ना समझे यह मूर्ख लोग।। 271।।
*जग जोगी वाला फेरा।। 270
*दो दिन का है डेरा सवेरे जाना है।।182।।
*कर गुजरान गरीबी में कोई दिन।।272।।
*कर गुजरान गरीबी में मगरुरी किसमें करता है।।272।।

                          २९गोरखनाथ शब्द।।4
*गोरख जोगी बाबा नाथ पुकारे।। 320।।
*एक रमता जोगी आया है जीने बिरला।। 318।।
*मैं रमता जोगी राम मेरा क्या करना से काम।।270।।
*जिनके मन में निश्चय होगी वे जोगी बनके।। 316।।

                       संत परिवार।।
७९कौन बड़ा परिवारी गुरु से।। 316।।

                           संत।।43
भक्ता वश भगवान कहे मैं तेरे कहने में।। 138।।
*जिसने जान अपना आप लिया।। 267।।
*बिन रमझ समझ नहीं पावे रे।। 278।।
*बोलता नजर नहीं आया म्हारे साधु।। 275।।
*मंगते फिरें हजार साधु कोई कोई।। 281।।
*कोई समझे चतुर सुजान समझ गुरुदेव की।। 314।।
*अब पाई हमने परम गुरु की ओट।। 261।।
*अब मैं भूला रे भाई।। 36।।
*सोहम सोहम बोलो साधो।। 265।।
*ऐसी मौज हमारी साधु।। 275।।
*जिसने आपा मारा वह साधु संत कहावे।। 275।।
*जो नैनो अलख लखावे।। 274।।
*सतगुरु ब्रह्म लखाया।।262।।
*सद्गुरु अलख लखाया जिसमें अपना राम।। 264।।
*संतु सद्गुरु अलख लखाया।। 280।।
*सतगुरु अलख लखाया साधु।। 264।।
*मेरे सतगुरु चेतन चोर।। 264।।
*तुम सुनीयो संत सुजान गर्व नहीं करना रे।। 273।।
*संगत तो कर ले साधु की।। 271।।
*संतन के संग लाग री।। 271।।
*संतों का देश निराला है।। 276।।
*संतों का देश निराला हे।। 276।।
*संतो देखत जग बौराना।। 276।।
*क्यों फसा मरे जड़ वेद में।। 281।।
*संतों की शरण में आजा।। 273।।
*संतो के आगे कौन चीज बादशाही।। 271।।
*तुम देखो बाबा संत करें बादशाही।। 270।।
*संतो घर में झगड़ा भारी।। 273।।
*संतो देखो जग बौराना।। 285।।
*या विधि मारो गोता रे साधु।। 269।।
*हम उन संतो के दास जिन्होंने मन।। 272।।
*साधु है मुर्दों का देश एक।। 276।।
*जो 3 लोक से न्यारा।। 267।।
*साधु चुप का है निस्तारा।। 275।।
*साधु एक आप जग माही।। 273।।
*मेरे साधु भाई पारख है निज नाम।। 270।।
*साधु भजो नाम अविनाशी।। 273।।
*साधु वह जानो, मन पर जो काबू पाले।। 275।।
*साधु जन होते हरि के कलेजे की कोर।। 285।।
*साधो यह तन ठाठ तंबूरे का।। 262।।
*साधो सुर नर मुनि भरमांवे।। 247।।
*साधु भाई अवगत लिखा न जाए।। 284।।
ऐसा ऐसा ख्याल विचारों भाई साधो।।

                  
                  २ देश अगमपुर।।13
*वो बेगमपुर कैसा है।।256
*अमरगढ ले चल ओ सजना।।257।।
*अमरगढ़ बाका है रे भाई।।257।।
*हमने देखा अजब नजारा अमर लोक हम वासी।।258।।
*मथुरा जाऊं ना मैं काशी हम बेगमपुर के वासी।।258।।
*चलो चलें हम बेगमपुर गांव रे।।257।।
*अगमपुरी का ध्यान खबर सतगुरु करी।। 251।।
*घर तेरा अमरापुर बंदे जगत मुसाफिर।। 259।।
*हम परदेसी लोग फिर नहीं आएंगे।। 262।।
*हम हैं मस्त दीवाने लोग हमने।। 263।।
*जानेंगे दीवाने देश फिर नहीं आएंगे।। 263।।
*सतगुरु का देश निकाला मैंने देखा जाके।।264।।
*मैं दर्शन की प्यासी गुरुजी।।64।।
626   देखा देश अनोखा साधो।।
627 उमहाया मन उस घर का।।
627  चलो ना उस देश में जहां भरे अमी के ताल।।
627   शिखर में देश हमारा है।।
628   देखा देश अपारी साधु।।

                  १  ज्ञान।।15
          632 यह सब वाचक ज्ञान कहावे।।
638  ब्रह्म है सब में एक समान।।39।।
633  तेरा जीवन है बेकार गुरु ज्ञान के बिना।।38।।
*सतगुरु तेरा कर ले बेरा ।। 266।।
640  जिन को ज्ञान हुआ था छोड़ चले राजधानी।। 267।।
638  कोई समझेंगे चतुर सुजान समझ गुरुदेव की।। 283।
633 मेरे साधो भाई पारख है निज।।
634  सुनाऊं तने ब्रह्म ज्ञान को लटको।। 275।।
634  सुना था हमने गुरु अपने का ज्ञान।। 274।।
636  फीका लागे रे सिपाही सरदार।।
637  मिलता ना आतम ज्ञान गुरुऔ के बिना।।1।।
637  सतगुरु पूर्ण ज्ञान तुम्हारा।। 261।।
635  अगर है ज्ञान को पाना, गुरु की शरण आ भाई।।34।।634।      गुरु गम ज्ञान एक नारा रे साधु भाई? 
635  गुरु ज्ञान की भांग पिलाई।। 11।।
635  गुरु ज्ञान की हो बरसात आपके वचनों से।। 11।।
636  भाई रे ज्ञान बिना पच मरता।। 99।।
636  सतगुरु बांटे सै पुड़िया ज्ञान की।। 10।।
638। मेरे सच्चे गुरु ने ज्ञान की भांग पिलाई।।

                         तत्व ज्ञान।।
641  तत्वज्ञान के बारे में गुरु गोरख करें विचार।।
641  पांच तत्व और तीन गुणों में।।
642  तुर्यापद में आसन लाके गुरु गोविंद के।।

                             हेली।।27
644  पिया मिलन का योग से हमने कौन मिलावे।। 281।।
644  कैसे मिलूं मैं पिया संग जाए।। 59।।
653  पाया निज नाम हेली।। 282।।
645 हेली तू कौन कहां से आई।। 288।।
651  आगम गवन कैसे करूं।। 277।।
647  कठिन चोट वैराग्य की जाने कोई।। 278।।
652  कौन मिलावे मोहे पीव से।। 277।।
652  तूने मानसरोवर जाना है।। 277।।
649  कर जिंदगी कुर्बान।। 280।।
651  कर सतगुरु से प्रीत हेली।। 282।।
649  चल सतगुरु के धाम हेली।। 280।।
650  चलो उस देश में हे हेली।। 282।।
653  दिल महर्रम की बात हेली किसने कहूंगी।। 279।।
650  दो नैनो के बीच रमैया प्यारा।। 281।।
646  पिया पाया हेली तेरा है जिसका कर लो।। 277।।
646  पिया के फ़िक्र में भी मैं दीवानी।।
647  पीव मिलन का मौका भला मारी हेली।। 278।।
648  बिन सतगुरु पावे नहीं जन्म धराओ।। 279।।
649  मिल बिछड़न की पीर रि हेली।। 281।।
651  हरदम प्रीभी नहा म्हारी हेली।। 283।।
654  म्हारे सतगुरु दे रहे हेला रे।। 283।।
646  शब्द झड़ लाग्या हे हेली।। 277।।
654  सतगुरु ने वो दिया हेला रे।। 283।।        
644  सदा रहूंगी सत्संग में।। 279।। 
652  हेली छोड़ दे विरान आदेश चलो सतगुरु जी।। 279।।
653  हेली हमने नींद ना आवे हे।। 280।।
*648  हेली हमने नींद ना आवे हे।। 280।।
654। चल गुरु कि देश में हेली, सांस ये वृत्था जा।।
655। सतगुरु मिलने चलो हेली करो ना सिंगारों।।

                                हंसा।।43
669  सकल हंस में राम हमारा।। 283।।
672  तजदे हंसा भूल भरम को कर अपनी पहचान।। 
670  कर मेरे हंसा चेत।। 285।।
669  क्यों पीवे तू पानी हंसिनी।। 284।।
670  चलो हंस वही देश।। 285।।
670  चल हनसा उस देश जहां कभी मौत नहीं।। 284।।
672  चुग हंसा मोती मानसरोवर ताल।। 287।।
671  काया नगरी में हंसा बोलता।। 286।।
671  सरगुन मरण जीवन वाली शंस्य।। 286।।
671  हनसा गहो शब्द टकसाल।। 286।।
660  एक दिन उड़े ताल के हंस।। 292।।
664  कर ले भाई अंसा सतगुरु से मेल।। 300।।
660  कहो पुरातन बात हंसा।। 292।।
663  क्यों चाल चले से काग की।। 297।।
661  गुरु मेहर करे जब कागा से।। 293।।
659  चल हंसा उस देश समंद विच मोती है।। 291।।
661  जगमग जगमग होय, हंसा रे।। 294।।
657  जहां हंस अमर हो जाए।। 297।। 289।।
665  जाएगा हंस अकेला राम नाम।। 300।।
668  जिंदगी में हजारों का मेला लगा।। 287।।
667  डाटा ना डटेगा रे, रोक्या ना रुकेगा रे।। 287।।
666  देश विराना रे हनसा देश विराना।। 286।।
666  नहा हनसा नहा हनसा।। 301।।
661  पूर्ण गढ़ चल भाई हंसा रे।। 294।।
662  भज हंसा हरी नाम जगत में।। 294।।
 665।  मत लूटे हंस रस्ते में।। 301।।
667  मेरे हसा परदेसी जिस दिन तू।। 286।।
657  मेरे हंसा भाई सब जग भूला पाया।। 289।।
663  रे हंसा भाई देश पूर्वले जाना।। 298।।
664  रे हंसा भाई हो जा ने मस्त दीवाना।। 299।।
667  सुख सागर में आए के मत जाए पियासा।। 286।।
659  सुन हनसा भाई हंस गति।। 291।।
664  हंसा कौन देश के वासी।। 298।।
658  हनसा कहां से आया रे।। 290।।
658  सुन हंसा भाई, हंस रूप था जब तू आया।। 290।।
662  हनसा चाल बसो उस देश।। 295।।
658  हंसा निकल गया पिंजरे से।। 290।।
660  हंसा परम गुरु जी के देश चलो।। 293।।
659  हनसा हंस मिले सुख हुई।। 292।।
662  हम हंसा उस ताल के जहां मानक।। 295।।
665  हंसा यह पिंजरा नहीं तेरा।। 300।।
668  हंसों का एक देश है वहां जात ना कोई।। 288।।
669  है संत समागम सार हंस कोई आवेगा।। 288।।
673  काया रे तेरी पाव्नि बंदे हंस बटेऊ लोग।।

                                मंगल।।12
682  अखंड साहिब का नाम और सब।। 306।।
679  और बात थारे काम ना आवे।। 303।।
681  जो तुम पिया की लाडली री।। 304।।
679  तन सराय में जीव मुसाफिर।। 302।।
679  दुविधा को कर दूर धनी को।। 302।।
681  प्रीत उसी से कीजिए जो ओर निभावे।। 304।।
680  प्रीत लगी तुम नाम की।। 304।।
680  राम नाम की मौज गुरु से।। 303।।
681  सतगुरु सरने आए राम गुण गाईए।। 305।।
682  संत समागम  होय तहां।। 305।।
684  संत सेन को समझ भूल में क्यों भूलिया।। 306।।
683  सुन सतगुरु की तान नींद नहीं आती।। 306।।
684। जागो रे माया के लोभी सतगुरु चरण लाग रे।।



                        बाकी लिखने।।
सतगुरु अपने के सन्मुख रहना जग में लाज।।
कोई नहीं घर तेरा रे साधु भाई।।
हम रोज लगाने सट्टा तुम कर लो न धन कट्ठा।।
हम जूए के जवारी हम सट्टे के खिलाड़ी।
लगन कर टोह लियो भाई।।
शब्द में रमे रहना लगी है राम में लो।।
सबर बड़ा हथियार रखेगा कोई सूरमा।।
कृपासिंधु मुझे अपना बना लोगे तो क्या होगा।।
मने न्यू सोची थी माया चलेग मेरी गैल।।

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