*1531. चल हंसा उस देश जहां कभी मौत नहीं।।670।।

                            670
चल हंसा उस देश जहां कभी मौत नहीं।।
हर पल भय यहां मौत का रहता,
           अरे कोई मौत का दर्द है सहता।
                  रंक हो चाहे नरेश अमर कोई जोत नहीं।।
सच और झूठ की रहे लड़ाई, देख के हंसता काल कसाई।
             ठीक वक्त पर केस दया दिल होत नहीं।।
मां भी रोए बेटी भी रोए, पूत अनेकों हमने खोए।
           करें श्मशान में पेश, पूछते गोत नहीं।।
दास बिजेंदर कभी ना भूलना अमरपुर से अब है मिलना।
         लगे  काल की ठेस भजन कर सोच नहीं।।

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