*1524. मेरे हंसा परदेसी जिस दिन तो उड़ जाएगा।।667।।

                                   667
मेरे हंसा परदेसी जिस दिन तो उड़ जाएगा।
        तेरा प्यारा यह पिंजरा यहां जलाया जाएगा।।
पिंजरे को तो सदा सभी ने पाला पोसा प्यार से।
खूब खिलाया और खूब पिलाया रखा इसे संभाल के।
        हो तेरे होते इसको नीचे सुलाया जाएगा।।
तेरे बिना तरसती आंखें रहना चाहती साथ में।
तेरे बिना ना खाती खाना तू ही था हर बात में।
       तेरे पूछे बिना ही सारा काम चलाया जाएगा।।
रोए थे तो पर थोड़े दिन तक, भूल गए फिर बात को।
भाई हद से ज्यादा इतना ही कहना करवा देंगे वह याद को।           हलवा पूरी खा कर तेरा दिवस मनाया जाएगा।।
तुझे पता है अरे जो कुछ होना फिर भी क्यों ना सोचता।
मूर्ख वह दिन भी आएगा पड़ा रहेगा नोचता।
          जन्म अमोलक खो के प्राणी, फिर पछताएगा।।

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