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शब्द लिस्ट सितंबर नई लेटेस्ट।।

                        ।।गुरु वंदना।।      * काहे की भेंट चढ़ाऊं गुरु थारे।।2।। *किस पर मैं जान तुमने तो छोड़ दाता जी।।6।। * एक नाम लग जाऊं गुरुजी थारे।।15।। *नमो नमो म्हारे गुरुदेव को।। 68।। * सारे तीरथ धाम आपके चरणों में।। 14।।        * गुरु जी थारी महिमा भारी है।। 4।। *म्हारे गुरु के चरण की धूल मस्त लग रही ।।7।। *गुरु के समान नहीं दाता रे जग में।।3।। * गुरु के समान नहीं दूसरा जहान में।।3।। * गुरु के समान दाता और ना जहान में।।4।। *गुरु के समान दाता कोई नहीं है जग मांगन हारा।।4।। *गुरु भजा सोई जीता रे जग में।। *गुरु के चरणों में धरो ध्यान।।5।।  *हमारा दाता अपने ही उर में पाया जी।।8।। *मेरे बिछड़ गए दिलदार कोई मुझे मिला दे उनसे।। 55।। *तुम सुनियो दयाल म्हारी अर्जी।। 10।। मीरा।। *गुरु सुनियो अरज हमारी।। 22।। *गुरु जी औड़ निभाइयों मेरी।।2।।11।।             मुझ पर दया करो महाराज।। 125।। *मेरा कोई ना सहारा बिन तेरे।। 40।। *आया मैं थारी शर्ना गुरुजी।।30।। *चाहे भ...

भगवान गौतम बुद्ध करुणा के सागर - Lord gautam buddha ocean of co mpassion

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भगवान बुद्ध करुणा के सागर   तथागत भगवान गौतम बुद्ध करुणा के सागर ( Tathagat Gautam Buddha  ) भारत को प्राचीन काल में जंबूद्वीप कहते थे। भारत के एक राज्य मध्य प्रदेश , जो कि भारत के मध्य उत्तर सीमा पर स्थित है। मध्य प्रदेश की राजधानी कपिलवस्तु वहां शुद्धोधन राजा राज्य करता था। वह सूर्यवंशी क्षत्रिय कुल का था। उसकी दो रानियां थी। उनमें से एक का नाम था महामाया उसे एक पुत्र हुआ उसका नाम सिद्धार्थ। दूसरी रानी महाप्रजापति, उसे दो संतान हुई नंदा और रूप नंदा। रानी महामाया अपने मायके जा रही थी। उसका प्रसूति काल समीप आया था। आषाढ़ पूर्णिमा नजदीक आई थी बीच राह में लुंबिनी उद्यान लगता था। विश्राम के लिए वह कुछ पल के लिए रुकी। बारिश का एक कारवां आकर चला गया। रानी महामाया पल भर विश्राम करने के लिए शाल वृक्ष के नीचे छाया में बैठी। शाल वृक्ष की एक टहनी नीचे झुकी हुई थी। उसकी नाजुक पत्तियां तोड़ने के लिए वह खड़ी हुई ; तभी सिद्धार्थ गौतम बुद्ध का जन्म हुआ। उनके कोंमल पैरों का भारत की पावन भूमि को स्पर्श हुआ। वसुंधरा थरथराई। सामने हरा बगीचा ; सुपर खुला आकाश। ऐसे स्थान पर विश्...