*1518. जाएगा हंस अकेला तू राम नाम रट भाई है।।665।।

                                  665
जायेगा हंस अकेला तुम राम नाम रट भाई रे।
       झूठा यह जगत झमेला तू राम नाम रट भाई रे।।
सोच समझ इंसान बावले, काला काला करे गुमान बावले।
                       यह तन माटी का ढेला।।
पल में तेरा घमंड तोड़ दे, माया की बावले मरोड़ छोड़ दे।
                         तेरे साथ ना जावे धेला।।
राम नाम सुखदाई रे, तेरी क्यों ना समझ में आई रे।
                         दो दिन का जग में मेला।।
मुक्ति का कोई जतन कर ले, ईश संग तू राम सुमर ले।
                         तू बन जा भगत अलबेला।।

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