*1537. चुग हंसा मोती मानसरोवर ताल।।672।।

                                672
चुग हंसा मोती मानसरोवर ताल।।
सात समुंदर पुर रहे रे, उठे कुदरती झाल।
इनको समझ के तू नहा ले बिल्कुल मत करें टाल।।
आगे पर्वत गुफा सुंदरी देखत भए निहाल।
वहां मोती सदा निपजते, कभी ना पड़ता काल।।
सूरत पलट के देख प्यारे खिला अमोलक लाल।
चांद सूरज वहां दोनों ना ही जले कुदरती मशाल।।
अजब रोशनी देखी कोन्या,न्यू ए बिता दिए साल।
कौवा काग गिद्ध के जंग में न्यू ए उम्र दई गाल।।

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