*1502. सुन हंसा भाई, हंस गति में होना जी।। 659।।

                               659
सुन हंसा भाई हंस गति में होना जी।
जागै इतनै ज्ञान विचारै, ध्यान लगा के सोना।।
मनुष्य जन्म का चोला पा के बीज भजन का बोना।
बिना भजन कीमत ना इसकी, बेगी यो मत खोना।।
राम नाम का निर्मल जल है, भीतर मलमल धोना।
जन्म जन्म के पाप कटैं तेरे, मिटेचौरासी का रोना।।
दिल है ये एक जल का सागर, उलटी झाल समोना।
बिना विचार बड़बड़ बोलै, हुए कुरड़ी का ढोना।।
तेरी काया पे माल चौगुना, चौकस हो के रहना।
आज्ञाराम कर चले फैंसला, दूजा नहीं बिगोना।। 

Comments

Popular posts from this blog

स्वामी रणजीत सिंह प्रवचन।।

*1272. रस गगन गुफा में अजर झरै।।560।।

**1339 फकीरी का देखा लटका।।